छत्र सजा, जेठी मौली बंधी और शुरू हुई तपस्या की डगर

नंगे पांव बाबा की राह पर निकले श्रद्धालु, भिक्षा से भोजन और सेवा से साधना
दिव्य हिमाचल ब्यूरो – ऊना
शहर ऊना के समीपवर्ती डंगोली स्थित सिद्ध बाबा भर्तृहरि महाराज मंदिर में रक्षाबंधन के अवसर पर शनिवार को वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया गया। मंदिर में बाबा भर्तृहरि महाराज के निशान स्वरूप छत्र को जेठी मौली बांधकर विधिवत श्रृंगारित किया गया। इसके साथ ही आठ दिवसीय भ्रमण एवं सेवा परंपरा का शुभारंभ हो गया। इस दौरान श्रद्धालु वैराग्यपूर्ण जीवन जीते हुए विभिन्न स्थानों पर बाबा की महिमा का गुणगान करेंगे। परंपरा के अनुसार आठ दिनों तक इस यात्रा में शामिल श्रद्धालु भिक्षा मांगकर अपना भोजन जुटाते हैं। इस अवधि में वह सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाकर साधारण जीवन व्यतीत करते हैं। नंगे पैर चलना, जमीन पर सोना और दिन-रात सेवा में जुटे रहना इस धार्मिक परंपरा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान लोगों के घरों और विभिन्न स्थानों पर जाकर भिक्षा ग्रहण करते हैं तथा प्राप्त सामग्री से अपना गुजारा करते हैं। मंदिर के सेवादार वासुदेव शर्मा ने बताया कि उनके परिवार में यह सेवा परंपरा पांचवीं पीढ़ी से निभाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले सिद्ध बाबा भर्तृहरि महाराज का छत्र मकरैड़ स्थित मंदिर से यात्रा के लिए निकाला जाता था। करीब पांच दशक पूर्व डंगोली में मंदिर का निर्माण होने के बाद से यहीं से इस आठ दिवसीय धार्मिक भ्रमण की शुरुआत होती है।

जन्माष्टमी पर होगा यात्रा का समापन
आठ दिनों तक विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के बाद जन्माष्टमी के दिन इस धार्मिक यात्रा को विश्राम दिया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु विधिवत पूजा-अर्चना कर परंपरा का समापन करते हैं। वहीं, गुग्गा नवमी के अवसर पर कई स्थानों पर रोट का प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है। श्रद्धालु बाबा भर्तृहरि महाराज के समक्ष अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।