मेडिसिन ओपीडी काहर 10 में से एक मरीज वायरल से पीडि़त
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढऩे लगी है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आईजीएमसी की मेडिसिन ओपीडी में इन दिनों मरीजों की भीड़ लगी हुई है। अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में रोजाना आने वाले कुल मरीजों में करीब 10 फीसदी मरीज वायरल फीवर से पीडि़त पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या का असर अस्पताल के मेडिसिन वार्डों पर भी दिखाई दे रहा है। सोमवार को आईजीएमसी के डी ब्लॉक स्थित मेल-फीमेल मेडिसिन वार्ड में एक बेड पर दो मरीज भर्ती थे। एक ही बेड पर दो मरीजों के रहने से दोनों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मरीजों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाने के कारण उपचार के दौरान भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। एक ही बेड पर दो मरीजों को रखने से मरीजों की परेशानी बढऩे के साथ संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।
खासकर वायरल फीवर और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीडि़त मरीजों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं होने से संक्रमण एक मरीज से दूसरे तक पहुंचने की आशंका रहती है। इसके अलावा मरीजों को करवट लेने, आराम करने और सोने में दिक्कत होती है। वहीं मेडिसिन ओपीडी में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढऩे से यहां मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। रोजाना बड़ी संख्या में मरीज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, खांसी और अन्य वायरल लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। आईजीएमसी अस्पताल में रोजाना हजारों संख्या में मरीज उपचार करवाने आते हैं। अस्पताल में प्रदेश के अन्य जिलों से भी मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं।
वार्डों में बेड का बढ़ा दबाव
वायरल फीवर समेत अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढऩे से मेडिसिन विभाग के वार्डों में भी बेड पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि वार्डों में एक बेड पर दो मरीज रखने की नौबत आ रही है। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वार्ड के बाहर बैठने की जगह कम, तीमारदारों की भीड़
डी ब्लॉक के वार्डाे के अंदर दो मरीज एक बेड पर रहने को मजबूर हैं
तो वार्डो के बाहर तीमारदारों के लिए पर्याप्त बैठने की सुविधा नहीं है।
ऐसे में डी ब्लॉक के वार्डो के बाहर तीमारदारों की भीड़ रोजाना देखने
को मिलती है। बैठने की कोई पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण कोई तीमारदार खड़े तो कोई फर्श पर बैठने को मजबूर है। ऐसे में नए
ओपीडी ब्लॉक जाने वाले मरीज भी परेशान हैं क्योंकि नए ओपीडी
भवन जाने का रास्ता भी डी ब्लॉक से है।