डा. डी. रघुनन्दन बोले, बड़े निर्माण से पहले पहाड़ी क्षेत्रों की वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन जरूरी
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
हिमालयी क्षेत्र अपनी भौगोलिक और भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील है। बढ़ता वैश्विक तापमान और अनियोजित विकास यहां आपदा के खतरे को बढ़ा रहा है। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ डा. डी. रघुनन्दन ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में वैश्विक तापमान बढऩे से भारत समेत दुनिया में अत्यधिक वर्षा, अनियमित मानसून, हीट वेव और अन्य चरम मौसमी घटनाओं की तीव्रता बढ़ी है। डॉ. रघुनन्दन ने कहा कि फोरलेन सडक़ों, बड़े निर्माण कार्यों और अन्य परियोजनाओं में पहाड़ों की भूगर्भीय संरचना, ढलानों की स्थिरता, जल निकासी और स्थानीय पारिस्थितिकी की अनदेखी से भूस्खलन और भू-दृश्य में बदलाव हो रहे हैं। किसी भी शहर, पर्यटन क्षेत्र या संवेदनशील पहाड़ी इलाके में बड़े निर्माण की अनुमति देने से पहले उसकी ‘वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन’ जरूरी है। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुंडीर ने बताया कि समिति पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं पर अध्ययन और जन-जागरूकता का काम कर रही है। हिमाचल सहित देशभर में एक वर्ष का ‘फ्यूचर ऑफ इंडिया’ अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत पर्यावरण, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता, कृषि और आजीविका पर गांव स्तर पर अध्ययन होंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों से संवाद कर उनके अनुभव, समस्याएं और सुझाव भी दर्ज किए जाएंगे।