आठ से दस पंचायतों में पत्तियां सूखने से किसानों की बढ़ी चिंता, कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में पहुंचकर दिए बचाव के सुझाव
कार्यालय संवाददाता-नाहन
जिला सिरमौर की नकदी फसल अदरक एक बार फिर रोग की चपेट में आ गई है। शुरुआती चरण में जिले की आठ से दस पंचायतों के गांवों में अदरक की पत्तियां सूखने के मामले सामने आए हैं। इससे अदरक उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है। स्थिति का जायजा लेने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं की टीम प्रभारी डा. पंकज मित्तल की अगवाई में रेणुकाजी के काकोग पहुंची। इस दौरान उपनिदेशक कृषि विभाग सिरमौर साहब सिंह, परियोजना निदेशक आत्मा डा. नवदीप कौंडल सहित एसएमएस और अन्य अधिकारियों ने खेतों में पहुंचकर फसल का निरीक्षण किया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को रोग की रोकथाम और प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के वैज्ञानिक प्रभारी डा. पंकज मित्तल ने बताया कि अदरक की फसल में फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट रोग का प्रकोप पाया गया है। इससे पत्तियों पर छोटे, गोल या अनियमित भूरे-गहरे धब्बे बनते हैं, जो बाद में आपस में मिलकर पत्तियों के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं। इससे पत्तियां सूखने लगती हैं और पौधे की वृद्धि तथा कंद के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। वैज्ञानिक इसे प्रथम दृष्टया मौसम आधारित रोग मान रहे हैं। गौर हो कि इससे पहले भी सिरमौर में अदरक की फसल राइजोम अथवा गठ्ठी सडऩ रोग की चपेट में आ चुकी है। इस बार कई वर्षों बाद ब्लाइट का प्रकोप सामने आया है।
वैज्ञानिकों की सलाह, ये करें किसान
डा. पंकज मित्तल ने किसानों को खेत की स्वच्छता बनाए रखने और संक्रमित व अत्यधिक रोगग्रस्त पत्तियों को खेत से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी। खेत में जलभराव न होने दें और रोगग्रस्त फसल के अवशेष खेत में न छोड़ें। नाइट्रोजन उर्वरक का अत्यधिक प्रयोग न करें, जबकि पोटाश का प्रयोग पौधों को स्वस्थ रखने में सहायक होगा। वैज्ञानिकों ने बिल्टोक्स अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत का लेबल पर अनुशंसित मात्रा के अनुसार छिडक़ाव करने की सलाह दी। एक ही फफूंदनाशक का लगातार प्रयोग न करें। रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही साफ पानी और निर्धारित मात्रा में दवा का प्रयोग करते हुए छिडक़ाव करें। नोजल से पत्तियों की दोनों सतहों पर घोल की समान कवरेज सुनिश्चित करें।