समग्र शिक्षा और वैल्यूर फैबटेक के साथ त्रिपक्षीय समझौता, नवाचार-कौशल विकास के लिए मिलेगी मेंटरशिप व सुविधाएं
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर (बीआईसी-एचपीयू) ने समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश सरकार और वैल्यूर फैबटेक प्राइवेट लिमिटेड (वीएफपीएल) के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नवाचार, कौशल विकास, व्यावसायिक विचारों के विकास, इन्क्यूबेशन और उद्यमिता के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाना है। शिक्षा, सरकार और उद्योग के समन्वय से विद्यार्थियों के नए और रचनात्मक विचारों को व्यावहारिक रूप देने पर जोर दिया जाएगा। कुलपति प्रो. महावीर सिंह की मौजूदगी में समझौते की प्रक्रिया पूरी हुई। कुलसचिव ज्योति राणा ने कहा कि शिक्षा, सरकार और उद्योग की ऐसी साझेदारी विद्यार्थियों और युवा नवप्रवर्तकों के लिए नए अवसर पैदा करेगी। विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ वास्तविक परिस्थितियों में काम करने और नए विचार विकसित करने के अवसर मिलना जरूरी है। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल शैक्षणिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता, नवाचार, कौशल और उद्यमिता की क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए बेहतर वातावरण देना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समझौते से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, मेंटरशिप और आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी। समझौते के तहत बीआईसी-एचपीयू, समग्र शिक्षा और वीएफपीएल विद्यार्थियों के नए विचारों को परिष्कृत करने और उन्हें सही दिशा देने में सहयोग करेंगे। विशेषज्ञों की मेंटरशिप के माध्यम से आशाजनक विचारों की पहचान कर उन्हें व्यवहारिक और टिकाऊ उत्पाद, सेवा या कारोबार में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा। विद्यार्थियों को अपने आइडिया को केवल प्रोजेक्ट तक सीमित रखने के बजाय स्टार्टअप के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक सहयोग मिलेगा। नवाचार कार्यक्रमों के लिए आवश्यक अवसंरचना, सुविधाओं और संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध करवाने पर भी सहयोग किया जाएगा। तीनों संस्थान गतिविधियों की नियमित समीक्षा और परामर्श की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। कुलपति ने उम्मीद जताई कि समझौते से हिमाचल में स्टार्टअप, उद्यमिता का मजबूत माहौल तैयार होगा। इससे युवा रोजगार तलाशने के साथ रोजगार देने वाले उद्यमी बनने के लिए भी प्रेरित होंगे।
स्कूली विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ
बीआईसी-एचपीयू के प्रभारी डॉ. रवि कांत भाटिया ने कहा कि यह सहयोग केवल उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालयी विद्यार्थियों और युवा नवप्रवर्तकों के लिए भी उपयोगी मंच तैयार करेगा। विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर ही नवाचार, उद्यमिता और व्यावहारिक सोच से जोडऩे से उनमें भविष्य के लिए जरूरी कौशल विकसित किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन्क्यूबेशन सहायता, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और व्यावहारिक अनुभव मिलने से वे अपने विचारों को बेहतर तरीके से विकसित कर सकेंगे। इससे प्रदेश में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। समझौता ज्ञापन के संस्थागत समन्वय में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के आईपीआर सेल यानी पेटेंट सर्विसेज के अध्यक्ष डॉ. रमेश ठाकुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश सरकार की स्टेट क्वालिटी कोऑर्डिनेटर (सेकेंडरी) सोनिया शर्मा, वैल्यूर फैबटेक प्राइवेट लिमिटेड की स्टेट हेड रिचा मेहता, तकनीकी विशेषज्ञ अरुण शर्मा और डोमेन ट्रेनर गुंजन चौहान मौजूद रहीं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी से डॉ. संदीप चौहान और डॉ. मनीष कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। यह समझौता ज्ञापन सरकार, शिक्षा जगत उद्योग के बीच एक मजबूत साझेदारी स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे हिमाचल प्रदेश में अवसंरचना साझा करने, विद्यार्थियों की मेंटरशिप, नवाचार, इन्क्यूबेशन, उद्यमिता तथा कौशल विकास के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।