अज्ञान, दिखावा और पाप भक्ति में सबसे बड़ी बाधा

भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास गौर दास जी महाराज ने भगवान कृष्ण की लीलाओं का किया वर्णन, श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे, भक्ति का रंग निखरा

दिव्य हिमाचल ब्यूरो,ऊना
राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां में राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा एवं भजन संध्या कार्यक्रम के पांचवें दिन कथाव्यास गौरदास जी महाराज ने श्रीमद भागवत कथा को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण की अढाई वर्ष की लीला गोकुल महावन की है। उसके बाद वह नंद बाबा के साथ वृंदावन आ गए। यहां पर प्रभु ने गोपियों को प्रेम और भाव का रस प्रदान किया और साथ ही साथ राक्षसो का उद्धार भी किया। जब प्रभु गाय चराने वनों में गए तो एक दिन वृत्तासुर गौवंश अर्थात बैल के रूप में आया जोकि अज्ञान का प्रतीक है।

भगवान ने उसका वध कर दिया। ऐसे ही जब हम भक्ति करने बैठते हैं तो सबसे पहले अज्ञानता की बाधा ही आती है। यह बाधा गुरु कृपा और उनके सत्संग से दूर हो जाती है। अगली बार प्रभु के सामने बकासुर राक्षस आया। यह पूतना का भाई है। यह बगुले का रूप बनाकर आया जोकि दिखावे का प्रतीक है। भक्ति में दिखावा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। दिखावा करेंगे तो हमारी भक्ति में गिरावट आने लगेगी। इसके बाद अघासुर राक्षस अजगर के रूप में आया जोकि पाप का प्रतीक है। महाराज जी ने बताया जब हम भक्ति शुरू करते हैं तो हमें धीरे-धीरे पाप छोड़ देने चाहिए।