प्लांट बंद होने से सिलेंडरों के सहारे इलाज, प्रसूता-नवजात वार्डों में स्टाफ की बढ़ी मशक्कत
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
मातृ एवं शिशु कमला नेहरू अस्पताल केएनएच में ऑक्सीजन की सेंट्रल सप्लाई व्यवस्था करीब दो साल से पटरी पर नहीं लौट पाई है। अगस्त 2024 में ऑक्सीजन प्लांट भवन के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्लांट को बंद कर उसके उपकरण अलग कर दिए गए थे। इसके बाद ऑक्सीजन की वैकल्पिक व्यवस्था तो की गई, लेकिन वार्डों तक पाइपलाइन के जरिए सीधे पहुंचने वाली सप्लाई आज तक बहाल नहीं हो सकी। इसका सीधा असर अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ रहा है। फिलहाल वार्डों में जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचा कर काम चलाया जा रहा है। खासकर प्रसव के बाद ऑक्सीजन की जरूरत पडऩे वाली माताओं और नवजात शिशुओं के इलाज में यह व्यवस्था अतिरिक्त श्रम मांग रही है। सेंट्रल पाइपलाइन होने पर जिस ऑक्सीजन की सप्लाई सीधे बेड तक पहुंचती थी, अब उसके लिए सिलेंडर की व्यवस्था करनी पड़ती है।
सिलेंडरों के सहारे अस्पताल
फिलहाल केएनएच में ऑक्सीजन की पूरी सप्लाई सिलेंडरों के जरिए ही की जा रही है। सामान्य तौर पर प्रसव के बाद नवजात शिशुओं, रसौली और अन्य महिला रोगों के ऑपरेशन के दौरान लगातार ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन बंद होने से स्टाफ को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है, वहीं मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोरोना काल में बना था प्लांट
कोरोना काल में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग की ओर से यह ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। उस समय प्लांट को अस्पताल के लिए अहम सुविधा माना गया था। लेकिन भवन में दरारें आने और संभावित खतरे को देखते हुए अगस्त 2024 में इसे बंद करना पड़ा। प्लांट बंद होने के बाद उसके उपकरण भी अलग कर दिए गए।