भागवत कथा के तीसरे दिन कोटला कलां में बाबा बाल जी महाराज ने बरसाया अमृत, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, वृंदावन जैसा नजर आया माहौल
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-ऊना
श्री राधाकृष्ण मंदिर कोटला कलां एवं बाबा बाल जी महाराज आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा का श्रवण करने के लिए जिला सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कोटला कलां पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ और धार्मिक माहौल के चलते पूरा कोटला कलां क्षेत्र वृंदावन की नगरी के रूप में बदला-बदला नजर आया। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बाबा बाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को अच्छे कर्म करने और प्रभु का स्मरण करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। अच्छे कर्मों का फल भले ही तुरंत न मिले, लेकिन समय आने पर उसका फल अवश्य प्राप्त होता है। मनुष्य द्वारा किए गए कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण और व्यवहार में सदैव सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए। बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि बुरे कर्म मनुष्य के जीवन में बुरा समय लेकर आते हैं। अपने स्वार्थ या हित के लिए किसी दूसरे व्यक्ति का बुरा नहीं करना चाहिए।
दूसरों को नुकसान पहुंचाकर प्राप्त की गई सफलता कभी स्थायी नहीं होती। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सत्य, सेवा, सदाचार और परोपकार को स्थान दें तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहें। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सांसारिक जीवन की भागदौड़ के बीच भगवान का नाम जपना नहीं भूलना चाहिए। प्रभु के नाम का जाप मनुष्य के मन को शांति प्रदान करता है और उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान हमेशा अच्छे और पवित्र हृदय में वास करते हैं। जिस व्यक्ति का मन निर्मल होता है और जो दूसरों के प्रति प्रेम, दया और करुणा का भाव रखता है, उसके हृदय में स्वयं भगवान का निवास होता है। बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि ऐसे भक्तों को भगवान की प्राप्ति के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जब मनुष्य अपने कर्मों को अच्छा बनाता है और पूरे विश्वास के साथ प्रभु का स्मरण करता है तो भगवान स्वयं उसके जीवन में अपनी कृपा बरसाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम भी है। कथा में बताए गए आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। कथा के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर बाबा बाल जी महाराज के प्रवचनों को सुनते रहे। वहीं खूब जयकारे लगे।