पांवटा साहिब के दून ड्रामेटिक क्लब के कलाकारों ने राम वनवास, पिता-पुत्र प्रेम और राजा दशरथ-कैकेयी संवाद का सुंदर मंचन किया
कार्यालय संवाददाता-पांवटा साहिब
पांवटा साहिब के रामलीला मैदान में दून ड्रामेटिक क्लब के कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन जारी है। रामलीला के पांचवें दिन का शुभारंभ जगन्नाथ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष हरविंदर कुमार अरोड़ा, सचिव नीरज उधवानी और संदीप खुराना ने भगवान राम की आरती के साथ किया। इस दौरान उन्होंने सभी पांवटा वासियों को नवरात्रे की शुभकामनाएं दी। इस दौरान कलाकारों द्वारा राम वनवास का मंचन किया गया। इस दौरान पिता-पुत्र प्रेम, राजा दशरथ-कैकेयी संवाद, राम-सीता व लक्ष्मण का वन गमन व अयोध्या की प्रजा का राम प्रेम देख दर्शक भाव-विभोर हो गए और उनके आंसू छलक आए। वहीं राम-सीता व लक्ष्मण के वन जाने की बात जैसे ही भरत को मिली तो वह भी तुरंत वन को निकल गए। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से मंचन को जीवंत बना दिया। श्रीराम वनवास लीला के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी सरयू के किनारे जाते हैं और वहां केवट से अपनी नाव में बिठाकर सरयू पार करवाने को कहते हैं।
भगवान राम सरयू पार कर चित्रकूट पहुंच जाते हैं। अयोध्या में राम के वियोग में महाराजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते है, जब भरत और शत्रुघ्न को राम के वन गमन और दशरथ की मृत्यु का पता लगता है तो वह अयोध्या वापस आते हैं, कैकयी को भला बुरा कहते हैं। भरत तीनों माताओं के साथ गुरु वशिष्ठ, मंत्री सुमंत और शत्रुघ्न के साथ चित्रकूट की ओर प्रस्थान कर देते है, जहां पर भरत का श्रीराम से मिलाप होता है। भरत राम जी को आयोध्या ले जाने के लिए मनाते हैं, लेकिन राम नहीं माने और भरत उनकी चरण पादुकाएं लेकर लौट आए। इसके बाद रामलीला में अन्य प्रसंग दिखाए गए। 14 वर्ष के लिए वन में रहने के वचन को पूरा करने के मकसद से श्रीराम-लक्ष्मण-सीता वनों में पंचवटी नामक स्थान पर रहने के लिए पहुंच जाते हैं। 13 वर्ष का वनवास का अरसा पूरा हो चुका था। इसी दौरान सूर्पणखा उनकी जिंदगी में तूफान बनकर आती है। सूर्पणखा श्रीराम के सुंदर चेहरे पर मोहित होकर उनसे विवाह करने की जिद करने लगती है, जिस पर श्रीराम उसे लक्ष्मण के पास भेज देते है।