चक्की पर खनन का साया, विभाग की निगरानी पर सवाल

एनजीटी के निर्देश, फिर भी खनन की शिकायतें; दरिया की सुरक्षा पर सवाल विवादित स्थलों का सीमांकन कर संयुक्त निरीक्षण करवाने की उठी मांग

निजी संवाददाता- इंदौरा
प्रदेश के कांगड़ा जिले के डमटाल और माजरा में चक्की दरिया के आसपास कथित अवैध खनन का मामला प्रशासनिक निगरानी और पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। कांगड़ा जिला सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) में चक्की दरिया के एक हिस्से में खनन पर प्रतिबंध का उल्लेख है। वहीं, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी चक्की दरिया में अवैध नदी-तल खनन रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद माजरा और डमटाल में वर्ष 2026 के दौरान पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आना यह सवाल उठाता है कि क्या संबंधित क्षेत्रों में प्रतिबंधों और नियमों की प्रभावी निगरानी हो रही है? कांगड़ा जिला की डीएसआर के अनुसारए पठानकोट-जालंधर रेलवे पुल के नीचे चक्की दरिया के वर्तमान प्रवाह क्षेत्र में उच्चतम बाढ़ स्तर एचएफएल तक खनन पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिसूचना 26 जुलाई 2005 को जारी की गई थी। रिपोर्ट में डमटाल के आसपास रेलवे पुल के नीचे अवैध खनन से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख है।

ऐसे में डमटाल-माजरा क्षेत्र में शिकायतों वाले स्थलों की सटीक सीमाएं, भूमि की स्थिति और खनन की अनुमति की जांच महत्त्वपूर्ण हो जाती है। प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। मूल आवेदन संख्या 1034/2024 में एनजीटी ने दस दिसंबर 2024 को खनन एवं भूविज्ञान निदेशक कांगड़ा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को कंडवाल-लोदवां-टिपरी क्षेत्र में चक्की दरिया के किनारे अवैध नदी-तल खनन रोकने के निर्देश दिए थे। मार्च 2025 में संयुक्त समिति की रिपोर्ट से संबंधित कार्यवाही के दौरान चक्की दरिया के कुछ खनन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित न होने का मुद्दा भी सामने आया। इस पृष्ठभूमि में डमटाल-माजरा के संबंधित स्थलों की सीमांकन रिपोर्ट और वर्तमान अनुपालन स्थिति सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है। यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि एनजीटी के आदेशों की प्रयोज्यता उनके निर्धारित क्षेत्र और शर्तों के अनुसार ही होगी।


खनन विभाग की चुप्पी खड़े कर रही कई सवाल
डमटाल और माजरा में प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहे अबैध खनन विभाग को लेकर खनन विभाग की चुप्पी जहां अवैध खनन माफिया के हौंसले को बढ़ाने का काम कर रही है, तो वहीं दूसरी तरह भविष्य में इस क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली विस्फोटक स्थितियों की और इशारा भी कर रही है। इस क्षेत्र को अवैध खनन माफिया दिन रात खोखला करने में जुटा हुआ है और खनन विभाग मात्र मूकदर्शक बन तमाशा देख रहा है।

सरकार से अपेक्षा, संयुक्त निरीक्षण और जवाबदेही तय हो
डमटाल और माजरा के लिए जरूरी है कि खनन विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त निरीक्षण कर विवादित स्थलों का सीमांकन करें। डीएसआर में दर्ज प्रतिबंध, खनन पट्टों, पर्यावरणीय मंजूरियों और खनिज परिवहन के दस्तावेजों की जांच के साथ एनजीटी के लागू निर्देशों के अनुपालन की स्थिति भी स्पष्ट की जाए। यदि अवैध खनन की पुष्टि होती हैए तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो और पर्यावरणीय क्षति का आकलन किया जाए।