दूरदराज के स्कूलों में अब ऑनलाइन पढ़ाई, बिलासपुर के 14 स्कूल मेंटर स्कूल से जुड़ेंगे

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने संसाधन और मेंटर स्कूलों के साथ जोडऩे की दी मंजूरी
स्टाफ रिपोर्टर-बिलासपुर
जिला बिलासपुर के दूरदराज के 14 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारू बनाने के लिए वर्चुअल कक्षाओं की व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इन विद्यालयों को संसाधन एवं मेंटर स्कूलों के साथ जोडऩे की मंजूरी दी है। इसके तहत जरूरत के अनुसार ऑनलाइन कक्षाएं लगाई जाएंगी, ताकि विषय अध्यापकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयना देवी जी और स्वारघाट क्षेत्र के दूरस्थ विद्यालयों को चयनित संसाधन स्कूलों के साथ जोड़ा गया है। इनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर, घुमारवीं, टोबा, जुखाला और बरठीं को संसाधन एवं मेंटर स्कूलों के रूप में शामिल किया गया है। इन विद्यालयों के माध्यम से जरूरत के अनुसार दूरस्थ स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जाएगी।जिला बिलासपुर के दूरदराज के 14 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारू बनाने के लिए वर्चुअल कक्षाओं की व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है। निदेशालय ने इन विद्यालयों को संसाधन एवं मेंटर स्कूलों के साथ जोडऩे की मंजूरी दी है।

नियमित निगरानी में लगेंगी कक्षाएं
ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन के दौरान संबंधित मेंटर स्कूल की समय-सारिणी का पालन करना अनिवार्य होगा। स्कूल प्रधानाचार्यों को कक्षाओं की प्रभावी निगरानी के लिए एक अधिकारी नामित करना होगा। इसके अलावा संबंधित स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) को भी इस व्यवस्था की जानकारी देकर शामिल किया जाएगा वर्चुअल कक्षाओं के लिए उपकरणों की कमी होने पर संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्धारित निर्देशों के अनुसार आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करने को कहा गया है।

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
जिला बिलासपुर उच्च शिक्षा विभाग की उपनिदेशक नरेश कुमारी चंदेल ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरदराज के स्कूलों में भी पढ़ाई के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वर्चुअल कक्षाओं से विषय अध्यापकों की कमी से प्रभावित पढ़ाई को सहारा मिलेगा और विद्यार्थियों को नियमित रूप से पाठ्यक्रम पूरा करने में मदद मिलेगी। इस तरह की व्यवस्था का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए स्कूल स्तर पर प्रभावी समन्वय और निगरानी जरूरी है।