सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में बरसी चांदी

सीजन की पहली हल्की बर्फबारी से क्षेत्र में बढ़ी ठंड, चूड़ेश्वर महादेव के भक्तों में उत्साह, मौसम का मिजाज देख करेें यात्रा
निजी संवाददाता – नौहराधार
जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार ने अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। बुधवार देर शाम चूड़ेश्वर महादेव मंदिर परिसर सहित आसपास की पहाडिय़ों में सीजन की पहली हल्की बर्फबारी हुई। इससे क्षेत्र में ठंड का असर अचानक बढ़ गया है और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले दोपहर बाद क्षेत्र में बारिश का दौर चला, जिसके बाद देर शाम मौसम ने करवट बदली और चूड़धार की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी शुरू हो गई। चूड़ेश्वर महादेव मंदिर परिसर से सामने आए वीडियो में मंदिर की छतों, सीढिय़ों और सोलर पैनलों पर बर्फ की हल्की परत साफ दिखाई दे रही है। बर्फबारी के बाद चूड़धार का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर गया है। सीजन की पहली बर्फबारी की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों के साथ-साथ चूड़ेश्वर महादेव के श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्तूबर की शुरुआत में ही चूड़धार में बर्फबारी होना आने वाले दिनों में मौसम के और करवट लेने का संकेत है। क्षेत्र में इस बार अच्छी सर्दी और बर्फबारी की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि चूड़धार में मौसम तेजी से बदलने और ठंडी हवाओं के चलने के कारण यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मौसम को देखते हुए यात्रा करने की सलाह दी जा रही है। बुधवार देर शाम क्षेत्र में आए तेज तूफान ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। तूफान के कारण खेतों में लगी गाला फूल और सर्फ फूल की फसलों को नुकसान पहुंचा है। फूलों की खेती के लिए खेतों में लगाई गई जालियां और अन्य ढांचे कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि तेज हवाओं की चपेट में आने से फूलों की फसल भी प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार मौसम का अचानक करवट और तेज तूफान के कारण नकदी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का जायजा लेकर प्रभावित किसानों को उचित राहत एवं मुआवजा देने की मांग की है। एक ओर चूड़धार में हुई पहली बर्फबारी ने लोगों के चेहरे पर खुशी ला दी है, वहीं दूसरी ओर तेज तूफान से नकदी फसलों को पहुंचे नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज किसानों और चूड़धार की और रुख करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अहम रहने वाला है।