वन अवशेषों से बनेंगे बायो उत्पाद

वुडशास्त्र और आईआईटी रोपड़ के बीच शोध समझौता, जंगलों की आग रोकने-हरित अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
नगर संवाददाता-राजगढ़
हिमालयी जंगलों में आग की समस्या से निपटने और वन अवशेषों का उपयोगी उत्पादों में इस्तेमाल करने के लिए राजगढ़ के स्टार्टअप वुडशास्त्र प्राइवेट लिमिटेड ने पहल की है। कंपनी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ के बीच पांच वर्षीय शोध एवं विकास समझौता हुआ है। इसके तहत चीड़ की पत्तियों, सूखे पत्तों, टहनियों और लकड़ी के अवशेषों से बायो-कार्बन फाइबर, ग्रीन केमिकल्स और नैनो-मटेरियल विकसित करने पर शोध होगा। समझौते पर आईआईटी रोपड़ के डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) और वुडशास्त्र की निदेशक ऋचा भारद्वाज ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. इंद्रमणि धादा, आशीष कुमार तिवारी और मनीष भारद्वाज सहित शोधकर्ता मौजूद रहे।

कंपनी के संस्थापक एवं सीईओ वरुण कांत ने भी संदेश के माध्यम से दोनों टीमों का मार्गदर्शन किया। परियोजना के तहत वन अवशेषों से बायो-पॉलीओल्स, बायो-रेजिन, पर्यावरण अनुकूल पेंट, गोंद और जैव-अपघटनीय पैकेजिंग सामग्री तैयार करने पर शोध होगा। इसके अलावा लकड़ी और छाल में मौजूद लिग्निन से स्वदेशी बायो-कार्बन फाइबर विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। वुडशास्त्र आईआईटी रोपड़ के एमटेक और पीएचडी शोधार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शोध सहायता भी प्रदान करेगा। इस पहल से जंगलों में आग का जोखिम घटाने, आयात पर निर्भरता कम करने और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।