बेहाल…टीएमसी में दूसरे दिन भी क्रस्ना लैब में सेवाएं ठप

दो महीने से वेतन न मिलने पर कर्मचारियों में आक्रोश, मरीजों के नहीं लिए सैंपल, दूरदराज-दुर्गम क्षेत्रों से इलाज करवाने आए रोगी मायूस होकर लौटे

स्टाफ रिपोर्टर-टीएमसी
डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा में सोमवार को क्रस्ना लैब की जांच सेवाएं प्रभावित होने के बाद मंगलवार को दूसरे दिन भी जांच सेवाएं पूरी तरह बंद रही। जिसके कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लैब में सोमवार और मंगलवार को पूरे दो दिन मरीजों के सैंपल नहीं लिए गए, जिसके चलते दूरदराज क्षेत्रों से उपचार के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना जांच करवाए ही लौटना पड़ा। कई मरीजों को मजबूरन निजी लैबों में पैसे खर्च कर जांच करवानी पड़ी। क्रसना लैब में कार्यरत कर्मचारियों को करीब दो माह से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने और भुगतान संबंधी लंबित मामलों के चलते कर्मचारियों में रोष है। जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में क्रस्ना लैब की कुल पेंडेंसी करीब 100 करोड़ रुपए बताई जा रही हैए जबकि टांडा मेडिकल कॉलेज से संबंधित पेंडेंसी 3 करोड़ रुपए से अधिक होने की बात कही जा रही है।

सोमवार को इसका सीधा असर मरीजों की जांच सेवाओं पर देखने को मिला। दूरदराज से पहुंचे मरीज दूसरे दिन भी हुए परेशान। टांडा अस्पताल में उपचार के लिए कांगड़ा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से मरीज पहुंचते हैं। इनमें कई मरीजों को डॉक्टर जांच करवाने की सलाह देते हैं। सोमवार और मंगलवार को लैब में सैंपल नहीं लिए जाने के कारण मरीजों को निजी लैबों का रुख करना पड़ा। इससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा और अस्पताल में आने-जाने वाले दूरदराज के मरीजों को विशेष परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि आपातकालीन मरीजों को कुछ हद तक जांच सुविधा उपलब्ध रही। लेकिन सामान्य मरीजों की जांच सेवाएं प्रभावित होने से अस्पताल परिसर में परेशानी का माहौल रहा। मरीज परेशान हैं।


क्रसना लैब में करीब 44 से ज्यादा कर्मचारी
टांडा मेडिकल कालेज की क्रसना लैब में करीब 44 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।