भू-स्थानिक तकनीकों से विकास की राह तलाशेंगे शोधार्थी

पांवटा कालेज की राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के 260 छात्रों-शोधार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यालय संवाददाता-पांवटा साहिब
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी राजकीय महाविद्यालय पांवटा साहिब के भूगोल विभाग की ओर से आयोजित एक सप्ताह की राष्ट्रीय स्तरीय बहुविषयक कार्यशाला का गुरुवार को समापन हो गया। 31 अक्तूबर से 5 नवंबर तक आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय ‘सतत विकास के लिए भू-स्थानिक तकनीकें, भौगोलिक चिंतन एवं स्थानिक प्रतिरूपण’ रहा। इसमें देश के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से करीब 260 विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। कार्यशाला के दौरान भूगोल एवं भू-सूचना विज्ञान के विशेषज्ञों ने अपने अकादमिक अनुभव साझा किए। विभिन्न तकनीकी सत्रों में आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों, सतत विकास, जलागम प्रबंधन और समकालीन भौगोलिक चिंतन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में भूगोल का महत्व केवल भौतिक परिवेश के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला में रोहड़ू के डॉ. अजय चांजटा, रेवेन्शॉ विश्वविद्यालय कटक के डॉ. मल्लिकार्जुन मिश्रा, राजकीय महाविद्यालय अर्की के डॉ. अमित शोष्टा और संगड़ाह के डॉ. धन देव शर्मा सहित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के डॉ. सीमा चौधरी, डॉ. नरेंद्र पंघाल, डॉ. अंजन डेका और डॉ. ख्याल चंद ने व्याख्यान दिए। वक्ताओं ने भूगोल विषय में हो रहे वैचारिक बदलावों और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में आधुनिक भौगोलिक तकनीकों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
शोधार्थियों को मिला नया मंच
कार्यशाला का आयोजन संयोजक प्रो. विम्मी रानी, आयोजन सचिव लेफ्टिनेंट संदीप शर्मा और प्रो. कमलेश शर्मा के समन्वय से संपन्न हुआ। समापन समारोह में कार्यशाला की शैक्षणिक उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसमें बताया गया कि आयोजन ने शोधार्थियों को नवीन भौगोलिक अवधारणाओं और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।