इंदौरा क्षेत्र में नदी-नालों और खड्ड में जेसीबी और पोकलेन मशीनों से सीना हो रहा छलनी, पर्यावरण को भारी नुकसान
निजी संवाददाता-इंदौरा
इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन माफिया का आतंक इस कदर हावी हो चुका है कि दिन हो या रातए किसी भी नदी, नाले या खड्ड में चले जाइए, जेसीबी और पोकलेन मशीनें नदियों और खड्डों का सीना छलनी करती नजर आ जाएंगी। क्षेत्र के मौजूदा हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे यहां प्रशासन नाम की कोई चीज मौजूद ही नहीं है। अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए अधिकृत खनन विभाग की मौजूदगी के बावजूद इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में है। अवैध खनन से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में व्यास दरिया और चक्की दरिया प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरोप हैं कि इन दोनों नदियों की मुख्य धारा के बीचोंबीच बड़ी-बड़ी पोकलेन और जेसीबी मशीनों से दिन-रात खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि लगातार हो रहे इस खनन से हजारों हेक्टेयर भूमि प्रभावित होकर बंजर हो चुकी हैए लेकिन इसका आकलन करवाने के लिए आज तक खनन विभाग और उपमंडल व जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई।अवैध खनन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी पहले ही सख्त रुख अपना चुका है।
एनजीटी के 26 फरवरी 2021 के आदेशों की अनुपालना में हिमाचल प्रदेश सरकार ने 18 अगस्त 2022 को अधिसूचना जारी कर अवैध खनन से पर्यावरण और पारिस्थितिकी को हुए नुकसान का आकलन तथा क्षतिपूर्ति वसूलने की व्यवस्था निर्धारित की थी। इस अधिसूचना के तहत उपमंडल अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित कर अवैध खनन से हुए नुकसान का आकलन करने का प्रावधान किया गया। इसमें खनन अधिकारीए लोक निर्माण विभागए वन विभागए पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका निर्धारित की गई है। अवैध खनन में इस्तेमाल वाहनों और मशीनों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने की व्यवस्था भी की गई है। इतना ही नहींए एनजीटी ने 20 सितंबर 2022 को ऊना जिला के स्वां दरिया में अवैज्ञानिक और अनियंत्रित अवैध खनन के मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे। अधिकरण नेपर्यावरणीय नुकसान की क्षतिपूर्ति व अभियोजन की कार्रवाई में कमी पर चिंता जताई थी।
क्षेत्र के लोगों में स्थानीय विधायक से शिकायत
अवैध खनन को लेकर क्षेत्र के लोगों में स्थानीय विधायक के प्रति भी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का सवाल है कि क्या विधायक महोदय को दिन.रात हो रहे इस अवैध खनन की जानकारी नहीं हैघ् यदि जानकारी है तो आज तक उनके द्वारा इस गंभीर मामले को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष प्रभावी ढंग से आवाज क्यों नहीं उठाई गईघ् जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल विकास कार्य करवाना ही नहींए बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और जनता के हितों की रक्षा करना भी है। अब सवाल केवल अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई का नहींए बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही का भी है जिनके पास इसे रोकने और पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करवाने की जिम्मेदारी है। एनजीटी के आदेशए प्रदेश सरकार की अधिसूचना और खनन संबंधी नियम मौजूद होने के बावजूद यदि व्यास और चक्की दरिया में कथित अवैध खनन जारी है, तो आखिर इन आदेशों की अनुपालना कौन सुनिश्चित करवाएगा। क्या प्रशासन किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान का इंतजार कर रहा है।