अदित कंसल, लेखक नालागढ़ से हैं

महिला प्रत्याशी के विजय होने पर लोग उस महिला को कम, उसके पति, पुत्र, पिता, ससुर को अधिक मुबारकबाद देते हैं। चौराहों पर चर्चा होती है कि फलां की घरवाली जीत गई। आखिर कब हम महिला के अस्तित्व, सामर्थ्य, अस्मिता व गरिमा को सम्मान देंगे? स्पष्ट है कि जब महिला जीत कर या मनोनीत होकर