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विविध समाज को चाहिए विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं टाटा लिटरेचर लाइव 2018 (मुंबई लिटफेस्ट) में नवंबर 15, 2018 को ‘भारत को राष्ट्रपति प्रणाली की आवश्यकता है’ विषय पर एक बहस…

हिंदू एकता

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं निसंदेह हिंदुओं को एकजुट करना कठिन है। जैसा भागवत ने कहा, ‘‘वे कभी साथ नहीं आते, कभी साथ नहीं रहते, वे कभी साथ मिलकर काम…

भारत का बंटवारा संविधान पर असहमति की देन

संसदीय प्रणाली की वर्ष 1937 की इस असफलता के कारण ही पाकिस्तान का जन्म हुआ। इस प्रणाली की केवल बहुमत सरकारों की धारणा ने लीग के संघर्ष को अर्थहीन बना दिया। क्योंकि भारत में मुस्लिम अल्पमत की स्थिति बदलने वाली नहीं थी, इसलिए लीग…

भारत और अमरीका की स्वतंत्रता की भिन्न राहें   

हम ढुलमुल भारतीयों ने विपरीत दिशा पकड़ी, और केंद्रीकृत सरकार की ब्रिटिश किस्म को अपना लिया। हमने कई अमरीकी सिद्धांतों — संघवाद, राष्ट्रपति पद, न्यायिक समीक्षा, अधिकार-अधिनियम, आदि — को ब्रिटिश संसदीय प्रणाली में जोड़ने का प्रयास किया।…

भारतीय विशिष्टतावाद महान भारत निर्माण के लिए नया पंथ

हमारे विकल्प ये हैंः वर्तमान धर्मनिरपेक्षता जारी रखें, अमरीका जैसी धर्मनिरपेक्षता अपनाएं, धर्म राज्य की स्थापना करें, या कुछ नया तैयार करें। भारत की मौजूदा स्थिति, जहां सरकार खुलकर धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो सकती है, स्पष्टतया कामयाब…

‘धर्म राज्य’ के संविधान की परिकल्पना उपयुक्त नहीं

उपाध्याय जीवन पर्यंत हमारे संविधान के आलोचक रहे। वर्ष 1965 में उन्होंने अपने ‘एकात्म मानववाद’ (Integral Humanism) के सिद्धांतों के तहत इसे बदलने की अपनी योजना प्रस्तुत की। एक नए भारत, ‘धर्म राज्य’ के विषय में उनके विचार भाजपा द्वारा इसके…

मूल संसदीय सिद्धांत तोड़ती भारतीय शासन प्रणाली

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं अंगे्रजी में ‘दि क्विंट’ में प्रकाशित (22 मार्च, 2018) फॉलो करें : twitter@BhanuDhamija समय आ गया है कि हम भारतीय अपनी…

हिंदू राष्ट्र या अखंड भारत नहीं, महासंघ से बनेगी बात

हिंदू राष्ट्र व अखंड भारत, दोनों अभियान असफल होने की आशंका है। अखंड भारत का पुनर्निर्माण पहुंच से परे, और हिंदू राष्ट्र अंततः आत्मघाती लगता है। एक वृहद् भारत के निर्माण की अभिलाषा सफल होने के यदि अवसर हैं तो वे समान विचार वाले देशों का एक…

भारतीय न्यायपालिका की ओवरहॉलिंग आवश्यक

भारतीय न्यायपालिका ने अत्यधिक मामलों में न्याय न देकर, लटकाकर, या आधा-अधूरा काम कर अन्याय किया है। इसके प्रदर्शन के कुछ मापदंडों पर विचार करें। भारतीय अदालतों में दो करोड़ बीस लाख से अधिक केस लंबित हैं। जिनमें से 60 लाख पांच वर्ष से ज्यादा…

संविधान के हास्यास्पद ‘नियंत्रण और संतुलन’

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं किसी देश के संविधान का प्राथमिक उद्देश्य एक उत्तरदायी सरकार की स्थापना है। ऐसा अकसर शासन की स्वतंत्र संस्थाओं की स्थापना…

संसदीय प्रणाली का संविधान के मूल ढांचे से मेल नहीं

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं मूल ढांचा सिद्धांत पर आम सहमति नहीं है। डा. सुभाष कश्यप लिखते हैं कि ‘‘संविधान की सभी विशेषताओं को निर्धारित करने वाला ऐसा…

भारत के संविधान की समीक्षा अब आवश्यक

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं संविधान के कार्यचालन की समीक्षा को गठित राष्ट्रीय आयोग द्वारा किया गया अंतिम पुनर्मूल्यांकन शुरुआत से ही राजनीति का शिकार…

विश्व गुरु भारत कैसे बने

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं विश्व गुरु बनने से सभी भारतीय गौरवान्वित होंगे। हम सभी उन दिनों के वैभव को तरसते हैं जब हमारे लोग विचार के शिखर पर जा…

भारत में क्यों नहीं प्रभावी विपक्ष

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं भाजपा की सफलता उन कारकों की ओर संकेत करती है जो भारत में नए विपक्ष के उभरने को आवश्यक हैं। नए विपक्ष की एक मध्यमार्गी…