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पर्यटकों को लुभाने के लिए पहाड़, नदियां, जंगल, डैम, चिडि़याघर, मंदिर, नामी शहर, खजियार झील, बीड़-बिलिंग जैसे पैराग्लाइडिंग स्थल भी यहां हैं। इसके बावजूद हम लोग न तो युवाओं को रोजगार से जोड़ पाए और न ही सरकारों का खाली खजाना भरने में कामयाब बन पाए हैं। हैरानी की बात यह है कि विदेशी लोग

यकीनन इस समय बच्चों को अतिरिक्त पढ़ाई करने की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप एक स्टडी प्लान बनाएं। मसलन, बच्चा पूरे दिन में कितनी देर पढ़ाई करेगा और उसे कितनी देर का ब्रेक लेना है। एक बार में वह कितने पार्ट को कवर करेगा, इन सबकी प्लानिंग पहले ही कर

जब तक देश में सामाजिक भेदभाव समाप्त नहीं हो जाता, इस वर्ग को आरक्षण की सुविधा मिलती रहेगी। देश में न्याय, सौहार्द, समानता कायम कर ही डा. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है… मनुष्य के जीवन की हर चुनौती वह चाहे सामाजिक, सांस्कृतिक या फिर आर्थिक क्षेत्र हो, का सामने करने में

हम जब कभी भी, चाहे वह राजनीतिक चिंतक हो या सामाजिक कार्यकर्ता, बाबा साहेब अंबेडकर के बारे में सोचते हैं तो उन्हें हम अधिकांशतः एक दलित नेता के रूप में ही दर्शाते हैं। परंतु डा. अंबेडकर को मात्र दलित नेता कहना उनकी विद्वता व उनके द्वारा किए गए सामाजिक तथा आर्थिक तंत्र में कार्यों को

अतः कम ही सही, लेकिन श्रमिक को कुछ रोजगार मिलता रहे, इसके लिए जरूरी है कि श्रम की उत्पादकता को  बढ़ाया जाए। श्रम की उत्पादकता बढ़ाने के दो प्रमुख उपाय हैं। एक यह कि उत्तम मशीनों का उपयोग किया जाए जिससे कि उसी कुशलता के स्तर का श्रमिक अधिक उत्पादन कर सके। दूसरा यह है

देश की आज़ादी व स्वाभिमान के लिए बलिदान देकर शौर्यगाथाओं के मजमून लिखने वाले वीरभूमि के शूरवीरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। साथ ही हिमाचल रेजिमेंट भी दी जाए… देश की आजादी के बाद 15 अप्रैल 1948 को 30 पहाड़ी रियासतों के एकीकरण के साथ हिमाचल प्रदेश स्वतंत्र भारत की इकाई के रूप

अब देश में नई ई-कॉमर्स नीति तैयार करते समय सरकार का दायित्व है कि ई-कॉमर्स से देश की विकास आकांक्षाएं पूरी हों तथा बाजार भी विफलता और विसंगति से बचा रहे। नई ई-कॉमर्स नीति के तहत सरकार के द्वारा देश के बढ़ते हुए ई-कॉमर्स बाजार में उपभोक्ताओं के हितों और उत्पादों की गुणवत्ता संबंधी शिकायतों

जंगल में अगर फल, चारा, ईंधन, खाद, रेशा और दवाई देने वाले वृक्ष, झाडि़यां और घास लगाए जाएं तो बिना पेड़ काटे लोगों को अच्छी खासी आमदनी पैदा करके दी जा सकती है। अपने आसपास रोजी का साधन पैदा होने से लोगों में आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ती है। रोजी पर खतरे का भाव कम

कोविड-19 के लिए जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की बढ़ती मांग के कारण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की व्यवस्था पर बहुत मार पड़ी है और इनका संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। डब्ल्यूएचओ ने संक्रामक रोगों के संदर्भ में कहा है कि जब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बोझ पड़ता है तो वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली