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शिक्षा क्षेत्र में हिमाचल ने बेशक दूसरा स्थान प्राप्त किया है, मगर जेओए की परीक्षा में करीब 1.18 लाख युवाओं का बैठना इस बात को दर्शाता है कि हम भयावह बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे हैं… हिमाचल प्रदेश में आयोजित हो रही प्रतियोगी परीक्षाएं अब मजाक बन चुकी हैं। लोग पैसे के दम पर

सुविधा सम्पन्न लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए खुद को पिछड़ा साबित करना व गरीब बनने की जहनियत से बाहर निकालना होगा। मुल्क के सियासी रहवरों को समझना होगा कि देश की युवा ताकत को लोक लुभावन सियासी वादे, प्रलोभन व मुफ्तखोरी की खैरात नहीं चाहिए… ‘यावज्जीवेत सुखं जीवेत, ऋणं कृत्वा घृतम्

हम उम्मीद करें कि बिम्सटेक देश पांचवें शिखर सम्मेलन में सुनिश्चित किए गए संगठन के चार्टर और परिवहन मास्टर प्लान के क्रियान्वयन की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेंगे। साथ ही आपसी कारोबार बढ़ाने के लिए शुल्क बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ मंजूरी प्रक्रिया, नियमन और मानक जैसी बाधाओं के अविश्वास के संकट को

दूसरी तरफ  अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के मामलों में लोग सरकार और प्रशासन को कोसते हैं। परंतु इसमें इनका दोष भी नहीं है। दोष तो इसमें उन लोगों का है जो पेपर लीक करते हैं या इन धांधलियों में शामिल होते हैं। सरकार को आवश्यकता है कि वह कड़े

हालांकि फिल्म निर्माता सुधीर मिश्रा एक साक्षात्कार में इस बात से इंकार करते हैं कि यह वैचारिक फिल्म है। लेकिन साथ ही वह यह भी मानते हैं कि इस फिल्म में नक्सलवादियों के प्रति समर्थन है। नक्सलवादी जिस ढंग से हिंसा करते हैं, गला रेत कर हत्या करते हैं, जिस वर्ग की लड़ाई लडऩे का

पूरे संसार में जहां के खिलाड़ी श्रेष्ठ हैं वहां पर स्कूल व कालेज स्तर पर बहुत ही उत्तम खेल सुविधाएं मुहैया हैं। इस स्तर पर अगर हिमाचल प्रदेश में घटिया खेल सामान न खरीद कर उच्च क्वालिटी का खेल सामान खरीदा होगा तो स्तरीय खेल सुविधा होगी जिससे जहां जो खिलाड़ी प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव

हमारी टीम अभी आंखों का चश्मा हटाने की दिशा में काम कर रही है। चूंकि यह किसी के जीवन का प्रश्न है, अत: हम इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि हमारा हर काम पूरी तरह से जांचा-परखा हुआ हो। बड़ी बात यह है कि बहुत से इलाज घर बैठे करना संभव है, बिना

उपन्यास आनंदमठ 1763-1800 के संन्यासी विद्रोह की ऐतिहासिक घटना के बारे में है और इसलिए यह गीत देशभक्ति के आधार पर पूरी तरह से फिट बैठता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और मुख्य रूप से बंगाल के विभाजन के दौरान इस गीत ने लोकप्रियता और एक राष्ट्रीय महत्त्व प्राप्त किया। यह रवींद्रनाथ टैगोर थे जिन्होंने

आज जब भारत न केवल वैक्सीन निर्माण और अपनी संपूर्ण जनसंख्या को वैक्सीन लगाने में सफल हो रहा है, दुनिया के दूसरे मुल्कों की अपेक्षा कहीं बेहतर तरीके से संक्रमण से निपट रहा है, दवाइयों और उपकरणों के मामले में लगभग आत्मनिर्भर हो रहा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत में कोविड से होने वाली मौतों