ब्लॉग

प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का एक प्रमुख तत्त्व गुरुकुल व्यवस्था रही है। इसमें विद्यार्थी अपने घर से दूर गुरु के घर पर निवास कर शिक्षा प्राप्त करता था। गुरु के समीप रहते हुए विद्यार्थी उसके परिवार का एक सदस्य हो जाता था तथा गुरु उसके साथ पुत्रवत व्यवहार करता था। आत्म-निर्भरता की भावना विकसित होती

पंचायत प्रतिनिधियों का पंचायत में जातिगत एवं वर्गगत संख्या के आधार पर चयनित होना प्रदेश की पंचायतों के संतुलित व समग्र विकास की दिशा में सबसे प्रमुख अवरोध है। वर्तमान घटनाक्रमों से यह तथ्य प्रकट होता है कि मतदाता अपने क्षेत्र में स्वस्थ एवं सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थापित करने के प्रति उदासीन हैं… नववर्ष

कैबिनेट के मंतव्य के अनुसार जापान को कुशल कर्मियों को उपलब्ध करने के लिए हमें वर्तमान शिक्षा तंत्र के बाहर सोचना होगा। वर्तमान शिक्षा तंत्र का आमूलचूल सुधार करना होगा। सेंटर फार सिविल सोसायटी के एक अध्ययन के अनुसार हांगकांग, फिलिपीन्स, पाकिस्तान, आंध्र प्रदेश, दिल्ली-शहादरा, उड़ीसा आदि स्थानों पर प्रयोग किए गए हैं जिसके अंतर्गत

उनकी इस कलम का सफर तभी शुरू हो गया था जब वह एडवर्ड कॉलेज पेशावर में पढ़ते थे। उनकी शायरी का संकलन ‘तन्हा-तन्हा’ कॉलेज के दिनों में ही छप गया था। पठान होने के कारण वो एक लंबे, खूबसूरत नौजवान थे। आवाज़ में गहराई थी। उर्दू और फारसी साहित्य में पेशावर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर थे,

डा. जयंतीलाल भंडारी, विख्यात अर्थशास्त्री जरूरी है कि सेबी शेयर बाजार की गतिविधियों पर सतर्कता से ध्यान देकर शेयर बाजार को अधिक स्वस्थ दिशा दे। सेबी के द्वारा बाजार के संदिग्ध उतार-चढ़ावों की तरफ आंखें खुली रखी जाए। शेयर बाजारों में घोटाले रोकने के लिए डीमैट और पैन की व्यवस्था को और कारगर बनाया जाए। छोटे

प्रताप सिंह पटियाल, लेखक बिलासपुर से हैं देश में लव जिहाद व धर्मांतरण जैसी साजिश पर राजनीतिक गलियारों की सियासी हरारत भी खूब बढ़ती है। इन मसलों पर न्यायपालिकाएं भी चिंता जताकर सरकारों को आगाह करती आई हैं। अपराध मिटाने के लिए कानून के साथ जुल्मी मानसिकता के जहन में प्रहार की जरूरत है… पुरातन काल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार आने वाले चार सालों में ट्रंप इस मामले को ठंडा नहीं होने देंगे कि वर्तमान राष्ट्रपति जो बाईडेन अमरीका का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वह चुनाव में धांधली करके चोर दरवाज़े से राष्ट्रपति बने हैं। यदि यह बहस चलती रही तो यक़ीनन बाईडेन की सरकार के आगे, विदेशों में

कर्नल (रि.) मनीष धीमान स्वतंत्र लेखक इस बीते सप्ताह हिमाचल में ग्राम पंचायत के लिए चुनाव की तैयारी कर रहे कुछ प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस ले लिया तथा बचे हुए को चुनाव चिन्ह मिल जाने से जहां मौसमी पारा दिन प्रतिदिन नीचे गिरता जा रहा है, उसी के विपरीत सियासी पारा उसी गति से

भानु धमीजा सीएमडी, दिव्य हिमाचल व्यक्तियों के ऐसे छोटे समूहों को समस्त शक्ति सौंपने का दोष हमारे नागरिकों या राजनेताओं को नहीं बल्कि हमारे संविधान को जाता है। यह हमारी सरकार को केंद्रीकृत करता है, हमारी पार्टियों को नियंत्रित करने में असफल है और एक शक्तिहीन संघीय ढांचे का निर्माण करता है… यह अब स्पष्ट