संस्थानों को गढ़ सकते हैं व्यक्ति

प्रो. एनके सिंह ( प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) एक सामान्य सी अपेक्षा रहती है कि हर संवैधानिक एवं अन्य संस्थान स्वतंत्र व पारदर्शी रूप से कार्य करे। बेशक किसी भी संगठन की ढांचागत व्यवस्था उसमें…

प्रगति एवं पारदर्शिता को समर्पित बजट

प्रो. एनके सिंह ( प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) मोदी के विरोध में सक्रिय विदेशी मीडिया ने भी केंद्र सरकार के बजट का समर्थन किया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बजट को ‘बहुत बढि़या’ बताया है, वहीं…

भारत के लिए ट्रंप के राष्ट्रवाद का अर्थ

प्रो. एनके सिंह ( लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) कई समीक्षक सवाल करते हैं कि क्या इस तरह से ट्रंप सफल हो पाएंगे, लेकिन अब वह सत्ता में हैं और वही करेंगे जो उन्होंने कहा था। ट्रंपवाद के उदय से समूचा वैश्विक…

दामन में लगे कीचड़ को साफ करे सेना

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए कि सैनिकों में इस तरह की असहमतियों को लेकर सोशल मीडिया पर विडीयो पोस्ट करने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, उसे खत्म करने के लिए सेनाध्यक्ष को…

2016 : बाधाओं व बदलाव की गाथा

प्रो. एनके सिंह ( लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) जिस संयम के साथ देश की जनता ने पचास दिनों का इंतजार किया, वह अपने आप में एक अनूठी मिसाल थी। यह सामाजिक आचरण में आने वाला एक बड़ा बदलाव था। नोटबंदी के बाद सर्वोच्च…

दल से ज्यादा नेतृत्व मायने रखता है

प्रो. एनके सिंह ( प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) आज भी कई ऐसे आलोचक हैं, जो मोदी और ट्रंप की तुलना हिटलर या तानाशाहों से करते रहते हैं, लेकिन उनकी यह आलोचना यथार्थ की कहीं दूर है। ये दोनों ही…

भारतीय दृष्टि व एकता के प्रतीक हैं शिवाजी

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं शिवाजी स्मारक के निर्माण को लेकर देश के कई तथाकथित सेकुलर और उदारवादी लोगों ने विरोध में हल्ला काटना शुरू कर दिया कि इस परियोजना में 3600 करोड़ रुपए खर्च करने की क्या…

अतुलनीय मोदी और दिग्भ्रमित विपक्ष

प्रो. एनके सिंह ( लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) देश के सामान्य जन को बेशक इस फैसले के बाद कई दुख झेलने पड़े, फिर भी देश से भ्रष्टाचार को मिटाने सरीखे व्यापक राष्ट्रीय हित में वह मोदी के साथ खड़ा दिखा। इतिहास में…

सियासत के साए में हिमाचली विकास

प्रो. एनके सिंह ( लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) बड़े मसलों को एक तरफ रख दें, तो भी ग्रामीण व कस्बों के स्तर पर हमारे नेताओं का संकीर्ण दृष्टिकोण ही देखने को मिला है। यहां विकास पर ध्यान देने के बजाय दो प्रमुख दल…

राजनीतिक पागलपन का बढ़ता चलन

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं संबंधित एयरलाइन ने ममता के इस आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि विमान में पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध था। उसके थोड़े समय बाद ही जब वह अपने दफ्तर गईं, तो उन्होंने…

आम आदमी की पहुंच से परे है न्याय

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मैं व्यक्तिगत तौर पर कई ऐसे मामलों को जानता हूं, जो कि बेहद सरल हैं, लेकिन उनमें पीडि़तों को तारीख पर तारीख मिलते हुए कई वर्ष गुजर गए और आज तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं आ…

इंतजार करने और सब्र सीखने का समय

प्रो. एनके सिंह (लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं) देश के कई राजनेताओं ने भी नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया है और नीतीश कुमार ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी बहादुरी से शेर की सवारी कर रहे हैं। किसी व्यक्ति ने इस फैसले…

नए दोस्त बनाकर शत्रुओं को काबू करे भारत

प्रो. एनके सिंह (लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) रूस के निजी हित समूचे विदेशी संबंधों को रेखांकित करने का काम करेंगे और इसका एक संभावित नुकसान भारत को झेलना पड़ सकता है।  चूंकि सार्क की भविष्य में कोई खास…

टाटा घराने पर उभरे संकट

प्रो. एनके सिंह ( लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इतनी पेशेवर कंपनी की अंदरूनी कलह भी कभी सार्वजनिक हो सकती है और रतन टाटा ने सख्त निर्णय लेते हुए उनकी धारक कंपनी के मुखिया…

चीनी सामान का अविवेकपूर्ण विरोध

प्रो. एनके सिंह ( लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ) वैश्विक स्पर्धा हमारी ओर टकटकी लगाए हुए देख रही है और वर्तमान में कम लागत की विशेषता भविष्य में ‘मेक इन इंडिया’ के लिए और भी बेहतर संभावनाएं सृजित करेगी। इससे यह…