राजनीति और चुनार

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार हो सकता है परिवार में यह फैसला हो ही गया हो कि गद्दी पर प्रियंका की ताजपोशी कर दी जाए, लेकिन यदि ताजपोशी होनी ही है, तो यह काम इस प्रकार किया जाए कि यह बहुत भव्य प्रकरण होना चाहिए।…

कर्नाटक का कड़वा सच

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि विधानसभा के दस सदस्य उच्चतम न्यायालय में जाकर फरियाद लगा रहे हैं कि उनका त्यागपत्र स्वीकार किया जाए। उधर विधानसभा के अध्यक्ष हैं कि जब सदस्य…

राहुल के इस्तीफे के मायने

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार गांधी परिवार के अंदर का यह विवाद क्या है या फिर हो सकता है? वैसे तो इस झगड़े का धुंआ शुरू से ही उठ रहा था। विवाद शुरू से ही था कि विरासत कौन संभालेगा? राहुल गांधी या फिर प्रियंका…

पुराने भारत के मायने

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार वह पुराने वाले भारत के लिए छटपटा रहे हैं। इसमें कोई बुरी बात नहीं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह कौन सा पुराना वाला भारत चाहते हैं? कांग्रेस राज वाला भारत या उससे भी पहले वाला…

इस्लामी निवेश पद्धति से लूट

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पिछले कुछ साल से भारत में कुछ स्वार्थी तत्त्वों द्वारा यह प्रचार किया जा रहा है कि वे भारतीय जिनके पुरखे सैकड़ों साल पहले इस्लाम पंथ में शामिल हो गए थे, बैंकों में अपना पैसा जमा न करवाएं और न…

बंगाल में ममता की माया

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार सड़क पर कोई बंगाली जय श्री राम कहता हुआ मिल गया, तो ममता दीदी ने अपनी कार से उतर कर उन्हें सबक सिखाने की धमकियां देनी शुरू कर दीं। इफ्तार पार्टियों का आयोजन कर वहां अवैध…

विदेशी आक्रमणों के निहितार्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार गुरु नानक देव जी सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुगों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि प्रत्येक युग में एक-एक वेद प्रमुख था, लेकिन कलियुग की तो गति निराली है। कलियुग में अथर्ववेद की प्रमुखता थी,…

हिमाचल की बदलती राजनीति

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार इस बार सुखराम और वीरभद्र सिंह दोनों ही मंडी से भाजपा को उखाड़ने में एकजुट हो गए थे। दोनों को अपने परिवार, पुत्र / पौत्रों के भविष्य की चिंता थी, लेकिन मंडी के लोग इन दोनों परिवारों के पुत्र /…

नए अध्याय की शुरुआत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार इस पारिवारिक महल को पहला आघात तो 2014 में ही लग गया था, लेकिन अभी तक इस परिवार को विश्वास था कि यह एक बार फिर भारतीयों को धोखा देने में कामयाब हो जाएंगे और भारत के लोग अपना भाग्य इन के हाथों…

वासुकि मंदिर यात्रा के प्रयास

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार भद्रवाह में वासुकि नाग महाराज का यह मंदिर पता नहीं कितनी बार बना-बिगड़ा, कितनी बार इसने अपना आकार खोया और पाया, यह कौन कह सकता है । इस क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर इतिहास…

चुवानी पहर में बढ़ता तनाव

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो भूमि हिलती ही है। राजीव गांधी की यह हिलती हुई भूमि दिल्ली में तीन हजार सिखों को लील गई, लेकिन जो बात राजीव गांधी छिपा गए थे, वह यह कि…

नानक की यात्राओं में एकात्मता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार नानक की यात्राएं लोदी शासकों के राज्यकाल में हुई थीं। यह उस समय की तात्कालिक राजनीतिक स्थिति की ओर संकेत तो करती ही हैं, साथ ही यह सांस्कृतिक-सामाजिक स्थिति की ओर भी…

आखिर ये लोग कौन हैं?

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार अब असली प्रश्न जिस पर विचार करना जरूरी हो गया है, वह यह है कि आखिर ये लोग जो हिंदोस्तान में बैठकर पाकिस्तान के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं, वे लोग कौन हैं? जो लोग दावा करते हैं कि यदि वे न…

अंबेडकर को समझने की शर्त

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार यह ठीक है कि भारतीय समाज ने विदेशी शासन को कभी चुपचाप बैठकर स्वीकार नहीं किया, परंतु मूल प्रश्न यह है कि आखिर इतना बड़ा समाज मुट्ठीभर आक्रांताओं से पराजित कैसे हो जाता था? अलग-अलग…

जलियांवाला बाग से उठी ज्वाला

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पूरे तीन साल बाद मार्च 1922 को ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट को वापस ले लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जलियांवाला बाग में जब शांतिप्रिय जनता पर डायर की सेना गोलियों की बौछार कर रही थी,…