चुवानी पहर में बढ़ता तनाव

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो भूमि हिलती ही है। राजीव गांधी की यह हिलती हुई भूमि दिल्ली में तीन हजार सिखों को लील गई, लेकिन जो बात राजीव गांधी छिपा गए थे, वह यह कि…

नानक की यात्राओं में एकात्मता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार नानक की यात्राएं लोदी शासकों के राज्यकाल में हुई थीं। यह उस समय की तात्कालिक राजनीतिक स्थिति की ओर संकेत तो करती ही हैं, साथ ही यह सांस्कृतिक-सामाजिक स्थिति की ओर भी…

आखिर ये लोग कौन हैं?

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार अब असली प्रश्न जिस पर विचार करना जरूरी हो गया है, वह यह है कि आखिर ये लोग जो हिंदोस्तान में बैठकर पाकिस्तान के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं, वे लोग कौन हैं? जो लोग दावा करते हैं कि यदि वे न…

अंबेडकर को समझने की शर्त

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार यह ठीक है कि भारतीय समाज ने विदेशी शासन को कभी चुपचाप बैठकर स्वीकार नहीं किया, परंतु मूल प्रश्न यह है कि आखिर इतना बड़ा समाज मुट्ठीभर आक्रांताओं से पराजित कैसे हो जाता था? अलग-अलग…

जलियांवाला बाग से उठी ज्वाला

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पूरे तीन साल बाद मार्च 1922 को ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट को वापस ले लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जलियांवाला बाग में जब शांतिप्रिय जनता पर डायर की सेना गोलियों की बौछार कर रही थी,…

विभाजन से वायनाड तक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार केवल सत्ता के लिए मुस्लिम लीग से हाथ मिला लेना, एक प्रकार से सोनिया कांग्रेस का राष्ट्रवादी कदम ही माना जाएगा। यदि आज नेहरू-पटेल और महात्मा गांधी की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिंदा…

सैम का बयान और अंबेडकर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार इस मरहले पर बाबा साहिब अंबेडकर का ध्यान आता है। उनकी किताब थॉटस ऑन पाकिस्तान का ध्यान आता है। अंबेडकर ने उस किताब में आशंका जाहिर की थी कि यदि कल अफगानिस्तान भारत पर हमला कर देगा, तो भारत में…

महासमर का महागठबंधन

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार आखिर सोनिया गांधी को भी हिंदोस्तान में रहते हुए इतने साल हो गए हैं, इसलिए वह भी यहां के हवा-पानी को पहचानने लगी हैं। वह समझ गईं कि मीडिया को आगे करके, महागठबंधन का जो तिलिस्म खड़ा किया था,…

सेना पर सवाल जायज नहीं

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार सोनिया गांधी के वरिष्ठ नेता और नीति-निर्धारक दिग्विजय सिंह ने अपने पुराने सटीक अंदाज से अंत कर दिया। उसने कहा पुलवामा में भारतीय सैनिकों के मारे जाने का मामला तो महज एक दुर्घटना थी। अब बहस करने…

पुलवामा हमले के बाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार दुर्भाग्य यह है कि भारत की राजनीति में अपने आपको विपक्ष मानने का दावा कर रहे राजनीतिक दल यह भूल रहे हैं कि वे राज्य चला रही राजनीतिक पार्टी के विपक्ष में हैं, न कि देश के विपक्ष में।…

पाक संदर्भ में पुलवामा हमला

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पुलवामा हमले के बाद महबूबा मुफ्ती पाकिस्तान के पक्ष में बोल कर इन अलगाववादी समूहों में फिर से अपनी पैठ बना सकेंगी, निश्चित ही ऐसा आकलन पुलवामा हमले की योजना बनाने वालों का रहा होगा और…

लोकतंत्र पर छींटाकशी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार जाहिर है राष्ट्रवादी शक्तियों को सत्ता केंद्र में देखकर उन शक्तियों में घबराहट मचती जो अभी तक केंद्र में नियंत्रण कर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत के विसंस्कृतिकरण अभियान में लगी हुई…

ममता का सियासी नाटक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार देखना यह है कि सैयद अहमद शाह गिलानी और विजय माल्या को महागठबंधन का हिस्सा बनने का निमंत्रण कब मिलता है। ‘विभुक्षति किम न करोति पापम’, अर्थात भूखा आदमी कौन सा पाप नहीं करता? सत्ता की भूख का…

सैयद शुजा का धारावाहिक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार सोनिया गांधी और उनकी पार्टी कांग्रेस को यह पूरा अधिकार है कि वह भारत की राष्ट्रवादी सरकार को चुनावों की लोकतांत्रिक पद्धति से पराजित करे। इस काम के लिए अपने साथ कुछ दूसरे लोगों को भी मिला सकती…

पंजाब में इस्लामी आतंकवाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार लुधियाना में पकड़ा गया मौलवी लुधियाना के गांवों में यही कर रहा था, लेकिन वह केवल मजहबी तालीम नहीं दे रहा था, बल्कि आईएस से भी जुड़ा हुआ था और उनके लिए भी पंजाब में सक्रिय था। आतंकवादी जमातों ने…