कम्पीटीशन रिव्यू

कहते हैं कि बाबा जी की कृपा दृष्टि हुई और आत्मा ने हर वर्ष होली के दिन अपनी पत्नी के साथ रहने का  वादा किया। किंवदंती है कि तब से लेकर बाबा बड़भाग सिंह होली के दिन सारा दिन मैड़ी में ही निवास करते हैं और प्रेत-आत्माओं से सताए लोगों का इलाज करते हैं… कहा जाता है कि बाबा

राजा भीमचंद की माता ‘जलाल देवी’ ने, जो मंडी की राजकुमारी थी, मियां माणिक चंद को काम से अलग कर दिया। माणिक चंद पहले तो कांगड़ा गया और तब वहां के राजा का पत्र लेकर लाहौर के सूबेदार के पास पहुंचा। वहां से वह कुछ सेना लेकर बिलासपुर पर चढ़ाई करने आया… बिलासपुर राजा भीम चंद (1677

मंडी में राजा भवानी सेन के समय में एक किसान आंदोलन हुआ। राजा का वजीर जीवानंद पाधा एक भ्रष्ट, अत्याचारी और  दुष्ट प्रशासक था। उसने किसानों को डरा धमका कर सारे अनाज का व्यापार अपने नियंत्रण में कर लिया था। इसके साथ ही किसानों पर अनेक प्रकार के कर लगाकर उनका अत्यधिक आर्थिक शोषण भी

 गतांक से आगे… साइमन कमीशन की नियुक्ति ः  1919 के अधिनियम में व्यवस्था थी कि 10 वर्षों की अवधि व्यतीत हो जाने पर एक रॉयल कमीशन नियुक्त किया जाए जो ब्रिटिश  इंडिया  में  शासन प्रणाली के कार्यकरण की तथा प्रतिनिधि संस्थाओं के विकास की जांच करे और यह बताया गया कि क्या  उत्तरादायी सरकारी  के

चंद्रनाहन ग्लेशियर मुख्य हिमालय के दक्षिण पूर्व की ढलान में जिला शिमला के रोहडू क्षेत्र के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। ग्लेशियर पब्बर नदी को सिंचित करता है। कई अन्य  छोटे-छोटे ग्लेशियर चंद्रमोहन ग्लेशियर के साथ जुड़े हुए हैं। इस ग्लेशियर के समीप ही चंद्रनाहन झील स्थित है… गतांक से आगे… भादल हिमनद यह ग्लेशियर मुख्य

बायोटेक्नोलॉजी में करियर की क्या संभावनाएं हैं? — केवल शर्मा, डलहौजी यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है। आने वाले समय में इसकी उपयोगिता मानव जीवन से जुड़े कार्यकलापों में बढ़ती हुई देखी जा सकती है। इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। कृषि, चिकित्सा, उद्योग और फार्मास्यूटिकल इत्यादि क्षेत्रों में

प्रकृति को पढ़ना आसान नहीं है। प्रकृति ने जीवन दिया, तो जीने के लिए साधन-संसाधन भी दिए। जल हो या थल सब जगह सब के लिए व्यवस्था की। थल में यदि फसलों और फलों की बहार है, तो जल में भी जखीरा कम नहीं है। मछली के लिए जल में रहने की व्यवस्था है, तो

उन स्थितियों को भी हमेशा याद रखने की कोशिश करें, जब भावनाओं पर आपका नियंत्रण नहीं रहता। जिन स्थितियों में आपको ज्यादा गुस्सा आता है या जब आप अति उत्साहित होकर बहुत ऊंचे स्वर में बोलने लगते हैं, तब सचेत तरीके से भावनाओं पर काबू रखने की कोशिश करें। शुरुआत में आप के लिए ऐसा