कम्पीटीशन रिव्यू

भोजिया डेंटल कालेज एंड हास्पिटल बद्दी भोजिया डेंटल कालेज और हास्पिटल सोलन जिला के बद्दी के नजदीक भुड नामक स्थान पर स्थित है। यह कालेज भोजिया चेरिटेबल ट्रस्ट फार साइंस रिसर्च एंड सोशियल वेल्फेयर द्वारा मैनेज किया जाता है। यह संस्थान हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी द्वारा स्वीकृत है और डेंटल काउंसिल आफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त

1. चेहरे पर पिंपल्स आ रहे हों, तो समझ लें कि स्किन की सही तरह से क्लीनिंग नहीं हो पा रही है। उसकी सफाई का खास ख्याल रखें। एस्ट्रेंजेंट से स्किन क्लीन करें। फिर कॉटन पर टोनर लेकर चेहरे पर थपाथपाकर लगाएं। इससे ओपन पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे ब्लैक हेड्स नहीं आते। 2.

भविष्य एक पुरस्कार नहीं, यह एक उपलब्धि है 49 वर्षीय हरीश थवानी निंबस कम्युनिकेशन के खोजकर्ता और चेयरमैन हैं। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन मुंबई विश्वविद्यालय से की। उन्होंने वर्ष 1987 में इस कंपनी को एक विज्ञापन कंपनी के रूप में स्थापित किया था। वह तब पहचान में आए, जब उन्होंने काउंटडाउन शो सुपरहिट मुकाबला का निर्माण

आज कई ऐसी वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्रोफेशनल्स हैं, जो स्टूडेंट्स को कैरियर संबंधी तमाम तरह की जानकारियां दे सकते हैं। जरूरी है कि स्टूडेंट्स को इनका बेहतर इस्तेमाल करते आना चाहिए। निश्चित ही कैरियर के प्रति जागरूक स्टूडेंट्स के लिए यह नितांत जरूरी हो गया है कि वे अपने कैरियर के लिए ऐसे फील्ड का

1. जिला चंबाः फुलमू रांझू, कुंजू और चंचलो, राजा-गद्दण, भुनकु गद्दी, सूहीरानी गीत व लच्छी आदि। 2. जिला कांगड़ाः नुरपुरे दिए खतरेटिए, हरि सिंह राजेया, सुलिया टंगोई मेरी जान आदि कांगड़ा के लोकप्रिय गीत हैं। कांगड़ा के विवाह संबंधी गीत घोड़ी तथा दूल्हे के समीपस्थ संबंधियों पर व्यंग्यात्मक रूप से गाए जाने वाले गीत सिठनिया

कुल्लू घाटी  यह घाटी हिमाचल प्रदेश के मध्य में स्थित है और इसकी लंबाई व चौड़ाई क्रमशः 75 कि.मी. तथा 25 कि.मी. है। इस घाटी में स्थित प्रमुख नगर कुल्लू समुद्र से 1200 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। रोहतांग दर्रे के समीप यह घाटी समाप्त हो जाती है। रोहतांग दर्रा मनाली से लगभग 51 कि.मी.

किन्नौर के वस्त्राभूषण डोल्टूः यह सोने का बना कान का आभूषण है। किन्नौर में डोल्टु प्रायः पुरुष लोग पहनते हैं। किन्नौर में भांजे की शादी पर मामा द्वारा अपने भांजे को डोल्टु पहनाने की प्रथा है। इसका भार अधिक से अधिक अठन्नी भर होता है। इसके छोटे आकार को मुरकी कहा जाता है। अलोङ ः

बास्पा हाइडल परियोजनाः  यह परियोजना सतलुज की सहायक नदी बास्पा के पानी से तीन चरणों में कार्यान्वित की जाएगी, जिससे 300 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। इसे कार्यान्वित करने के लिए निजी क्षेत्र को दिया गया है। इस परियोजना के तीनों चरणों से बिजली का उत्पादन मई/जून, 2003 से शुरू हो गया है।

जिला कांगड़ाः बाबा गोरख नाथ जी की डिब्बी- यह स्थान ज्वालाजी मंदिर के साथ है। जिला मंडीः तत्तापानी- यह स्रोत नालदेहरा से 29 किलोमीटर दूर है। इसके बाईं ओर सतलुज बहती है। जिला किन्नौरः टापरी- यह किन्नौर जिला का प्रसिद्ध गर्म पानी का चश्मा है। यह स्रोत पर्यटकों में बहुत लोकप्रिय है। जिला शिमलाः ज्यूरी-