महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र

-गतांक से आगे... अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे। दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ 6 ॥ अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत…

कोटेश्‍वर महादेव की अद्भुत महिमा

कुमारसैन का वास्तविक नाम कुम्हारसेन है। कुम्हार शब्द का जन्म संस्कृत भाषा के शब्द ‘कुंभकार’ से हुआ है, जिसका अर्थ है मिट्टी के बरतन बनाने वाला। कुम्हारो के अस्तित्व के कारण इस स्थान का नाम कुम्हारसेन रखा गया होगा, जोकि आज कुमारसैन के नाम से…

क्यों प्रसिद्ध है सिद्धिविनायक मंदिर

नए साल में लोग घूमने-फिरने का प्लान बनाते हैं। खास कर धार्मिक स्थलों पर साल के आखिरी दिनों और नए साल की शुरुआत पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। खासकर मुंबई के इस सिद्धिविनायक मंदिर में इस दौरान श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है। यहां देश…

सतोपंथ झील

उत्तराखंड की धरती पर तमाम ऐसी जगहें हैं, जिनका इतिहास हमारे धार्मिक ग्रंथों से जुड़ा है। ऐसी ही एक बेहद खास जगह है सतोपंथ झील। यह चौखंभा शिखर की तलहटी पर बसी हिमरूप झील है। इसके साथ महाभारत काल की घटनाओं का ताल्लुक बताया जाता है। आइए जानते…

परमात्मा से नाता

बाबा हरदेव हम उनकी संतुष्टि नहीं कर पाएंगे और अंत में हमें कहना पड़ेगा कि हम सौंदर्य बताने में असमर्थ हैं। हम हार जाएंगे इसके आगे क्योंकि इसने दृश्य को ही पकड़ा है और हमने अदृश्य की घोषणा की है, जो बतलाने से बाहर है। सौंदर्य बतलाया…

तिब्बत में छिपा है तंत्र ज्ञान

जिसी की बात हैरान कर देने वाली थी। फिर भी जिसी ने जिस प्रकार सरलता से सब समझाया, सराहनीय था। जिसी ने आगे कहा- ‘यह कार्य हर साधक साधना के बल पर कर सकता है।’ जिसी जितनी सुंदर थी, उसका स्वर भी उतना ही मधुर और आकर्षक था। उसके पतले-पतले होंठों…

ड्ढकिस तरह किया जाता है वशीकरण

वशीकरण करने के लिए मोतियों की माला अथवा हीरे की माला श्रेष्ठ मानी गई है। इस माला में 27 मोती अथवा हीरे होने आवश्यक हैं। आकर्षण क्रिया के लिए माला के मनकों को घोड़े की पूंछ के बाल में पिरोना चाहिए तथा स्त्री मोहन एवं वशीकरण के लिए मनकों को…

विवाद से परे है ईश्वर का अस्तित्व

आरंभ में उससे तत्काल लाभ दीखता है, पर वह बाहर का आरोपण देर तक नहीं ठहरता। भयंकर आपरेशनों के समय रोगी को अन्य व्यक्ति का रक्त दिया जाता है। वह शरीर में 3-4 दिन से अधिक नहीं ठहरता। शरीर यदि नया रक्त स्वयं बनाने लगे तो ही फिर आगे की गाड़ी चलती…

बौद्धिक स्तर पर ज्ञान

सद्गुरु जग्गी वासुदेव योग विज्ञान के अनुसार मनुष्य के शरीर में कुल मिलाकर 114 चक्र हैं। आइए समझें कि आखिर ये चक्र हैं क्या? वैसे तो शरीर में इससे कहीं ज्यादा चक्र हैं, लेकिन ये 114 चक्र मुख्य हैं। इनमें से 112 शरीर के अंदर हैं और दो शरीर…

किसी अजूबे से कम नहीं हैं महाभारत के पात्र

कथानक है कि हैहय वंशाधिपति कार्त्तवीर्यअर्जुन (सहस्त्रार्जुन) ने घोर तप द्वारा भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न कर एक सहस्त्र भुजाएं तथा युद्ध में किसी से परास्त न होने का वर पाया था। संयोगवश वन में आखेट करते वह जमदग्नि मुनि के आश्रम जा पहुंचा…

जेन कहानियां : सच्चा स्वरूप

एक जेन गुरु के पास किसी युवा साधक ने आकर कहा, मैं अपने सच्चे स्वरूप की पहचान करना चाहता हूं। जेन गुरु कुछ नहीं बोले, अलबत्ता, उसकी बात पर ध्यान ही नहीं दिया। वह बार-बार आग्रह करता रहा, पर गुरुजी चुप्पी लगाए रहे। थक हार कर वह लौटने लगा, तो…

पदार्थ व चेतना का संयोजन

श्रीश्री रवि शंकर जीवन केवल पदार्थ ही नहीं, बल्कि इससे कहीं अधिक है। मानवीय जीवन पदार्थ व चेतना दोनों का संयोजन है। यदि मानव केवल पदार्थ होता, तो आराम की आवश्यकता ही नहीं थी। क्योंकि पदार्थ को आराम, बेचैनी, सुंदरता, बदसूरती, खुशी व दुख का…

श्रम के प्रति उपेक्षा

श्रम के प्रति उपेक्षा की वृत्ति आज हममें दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, जिससे हमारे जीवन में अनेकों विषमताएं और समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं। जीवन में असंतुलन पैदा हो गया है। तथाकथित पढ़े-लिखे, शिक्षित कहे जाने वाले वर्ग में तो यह वृत्ति और भी बढ़ती…

समय का महत्त्व

ओशो जब पहचान का संकट उत्पन्न हो जाए, जब भी व्यक्ति जान न पाए कि वह कौन है। जब भी अतीत की पकड़ ढीली पड़ जाए, जब भी व्यक्ति की परंपरागत जड़ें उखड़ जाएं, जब अतीत प्रासंगिक न रह जाए, यह संकट उत्पन्न हो, पहचान का महासंकट हम कौन हैं? हमें क्या…

व्रत एवं त्योहार

22 दिसंबर रविवार, पौष कृष्णपक्ष, एकादशी, सफला एकादशी व्रत 23 दिसंबर सोमवार, पौष, कृष्णपक्ष, द्वादशी, सोम प्रदोष व्रत 24 दिसंबर मंगलवार, पौष, कृष्णपक्ष, त्रयोदशी 25 दिसंबर बुधवार, पौष, कृष्णपक्ष, चतुर्दशी, क्रिसमस 26 दिसंबर…