प्रदेश में हीरो लाल दुर्ग में जीरो

केंद्रीय छात्र संघ (एससीए)के लिए हुए चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एक बार फिर प्रदेश में सबसे अधिक सीटें जीतने में कामयाब रही है। चुनावों में एनएसयूआई दूसरे व एसएफआई तीसरे स्थान पर रही है। एससीए चुनावों में एबीवीपी को 196 सीटें…

60 लाख में पड़े एससीए चुनाव

लिंगदोह कमेटी की सिफारिशेंे भले ही छात्र उम्मीदवार को पांच हजार का खर्चा करने की इजाजत देती होंे, मगर परोक्ष रूप से चुनाव का खर्चा देखा जाए, तो लाखों रुपए में हुआ है। एक कालेज में एक संगठन को पैनल उतारने के लिए बीस हजार रुपए तक खर्च करने की…

राजनीति से सीधा नाता

प्रदेश की छात्र राजनीति में तीन संगठन मुख्य भूमिका में हैं। इनमें एबीवीपी, एनएसयूआई व एसएफआई हैं। तीनों ही संगठनों की अपनी अलग-अलग विचारधारा है। इसी को लेकर वे शैक्षणिक संस्थानों में कार्य करते हैं। ये भले ही अपने को राजनीतिक दलों से कोसों…

कुडि़यां दी बल्ले-बल्ले

छात्र राजनीति में छात्राओं के बढ़ते कदम राजनीति में बदलाव के संकेत दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इस से यह भी स्पष्ट हो चुका है कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण चुनावों में देना तर्कसंगत है। प्रदेश में एससीए के लिए हुए चुनावों में सभी छात्र…

एबीवीपी वहीं, एनएसयूआई फिसली, एसएफआई ने पसारे पांव

ताजातरीन हुए एससीए चुनाव में यूं तो भगवा का बोलबाला रहा, लेकिन विश्वविद्यालय में परिषद के कब्जा करने के दावे ढेर हो गए हैं, जहां तक जिलावार परिणामों पर नजर दौड़ाएं, तो तीनों ही संगठनों ने कहीं न कहीं एक-दूसरे के दुर्गों में सेंध लगाई, जिला…

35-ए का पंगा खत्म करेंगे

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एससीए अध्यक्ष खुशी राम वर्मा ने कहा कि विवि की स्वायत्तता  बहाली के लिए आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विवि में पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में लगाई गई धारा-35 ए के कारण विवि की सारी शक्तियां छिन गई हैं।…

ओवरलोडिंग चलेगी छत पर न बैठें

दिव्य हिमाचल ः परिवहन विभाग संभालने के बाद का अनुभव कैसा है? क्या कुछ करने जा रहे हैं?   परिवहन मंत्री ः एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान स्टाफ की दिक्कतें दूर करने से लेकर कम्प्यूटरीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। एचआरटीसी में ड्राइवरों के…

धक्का स्टार्ट एचआरटीसी

सामाजिक क्षेत्र में दायित्व निर्वहन करने के दावे करने वाली एचआरटीसी शायद ही कोई ऐसा वर्ष रहा होगा, जब घाटे का राग अलापते न थकी हो। धूमल सरकार ने निगम की पतली हालत के चलते वित्तीय ग्रांट 80 करोड़ तक कर दी है। बावजूद इसके निगम का घाटा कम होने…

मुझसे नहीं अपने कर्मों से खौफजदा हैं वीरभद्र

दिहि ः अढ़ाई साल के कार्यकाल के सबसे सुखद क्षण सरकार के लिए कौन से रहे?   धूमल ः हर पल जनता की सेवा में समर्पित रहा। योजनाओं के कार्यान्वयन के बाद लोगों के चेहरे पर खुशी से सुकून मिला। चाहे वे किसान बागबान हैं या फिर दैनिकभोगी कर्मी।…

अढ़ाई वर्ष के ऊंचे ख्वाब

धूमल सरकार ने अपने अढ़ाई साल के कार्यकाल के दौरान हालांकि हर क्षेत्र में विकास को गति देने का पुरजोर प्रयत्न किया है, मगर  अभी भी पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस क्षेत्र में योजनाएं तो बहुत बनाई गईं, मगर उन्हें…