आभूषण खरीद अरबों में

प्रदेश में आभूषण का कारोबार सालाना 3 अरब के करीब आंका जाता है। अकेले करवाचौथ की ही बात करें, तो मार्केटिंग से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि शिमला में करीबन 20 करोड़, सोलन में 22 करोड़, मंडी में 18 करोड़ और कांगड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में…

महंगी कारें बनीं शान

नैनो की चमक-दमक बेशक कम नहीं हुई है, लेकिन जेब में पैसा रखने वालों के नैन इस पर ठहर नहीं रहे हैं। महंगी कारों को घर की शान बनाने के लिए एक होड़ लगी हुई है। कार अब लग्जरी नहीं रही है। लोग इसको जरूरत समझने लगे हैं और कार कंपनियों ने खरीददारों…

मेले हैं बड़े उपभोक्ता बाजार

हिमाचल की प्राचीन लोक संस्कृति के परिचायक यहां के मेले सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार के तौर पर सामने आए हैं। यही वजह है कि इनमें अब फ्रिज, टीवी व इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स से जुड़ी ब्रांडेड कंपनियों की फेहरिस्त में आईएफबी, एलजी, वर्लपूल, वीडियोकॉन,…

वाहनों पर वैट से कमाई

हिमाचल में वाहन बाजार का आकार आबकारी एवं कराधान विभाग को मिलने वाले सालाना वैट की दर से भी आंका जा सकता है। वर्ष 2008-09 में पेट्रोल पर वैट से हुई कमाई रुपए 1063929434 थी, जबकि यही दर वर्ष 2009-10 में बढ़कर रुपए 1138593245 पहुंच गई। हिमाचल…

सवा करोड़ के पार

इलेक्ट्रोनिक बाजार फेस्टिवल सीजन के मद्देनजर बाजार में इलेक्ट्रानिक्स कंपनियों ने अपनी चकाचौंध बढ़ा दी है और हिमाचली बाजार भी इस चकाचौंध से सराबोर हैं। 90 के दशक के बाद हिमाचल में आई अचानक समृद्धि के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की…

हिमाचली खेती के अर्थ बदलने का जज्बा

कृषि वैज्ञानिक डा. श्याम कुमार शर्मा कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के 10वें कुलपति हैं। कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी के पास कोहाला गांव में दो मार्च, 1951 को जन्मे श्री शर्मा ने आनुवंशिकी विषय की पीएचडी की है। छह जुलाई, 2010 को पालमपुर में…

कुलपति की प्राथमिकताएं

सबसे पहला कार्य बीज उत्पादन योजना को और सशक्त करना है, ताकि किसान बेहतर किस्म के साथ अधिक उत्पादन कर सकें। चूंकि पशु और कृषि एक-दूसरे के पूरक हैं, लिहाजा पशुपालन क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। पशुधन को बीमारियों से बचाना, नस्लों…

काम कम, शोर ज्यादा

हिमाचल में अब तक नाममात्र किसान ही जैविक खेती कर रहे हैं। नतीजतन किसान-बागबान जमकर कीटनाशकों, रसायनों का प्रयोग कर खेतों को जहरीला बना रहे हैं। सरकारी स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आलम यह है कि…

काम कम, शोर ज्यादा

हिमाचल में अब तक नाममात्र किसान ही जैविक खेती कर रहे हैं। नतीजतन किसान-बागबान जमकर कीटनाशकों, रसायनों का प्रयोग कर खेतों को जहरीला बना रहे हैं। सरकारी स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आलम यह है कि…

कमाल की आबोहवा, पर…

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक हिमाचल की प्राकृतिक आबोहवा जैविक खेती के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। बावजूद इसके हिमाचल में जैविक खेती के लिए अधिक तरजीह नहीं दी जा रही है। किसान भी जानकारी के अभाव में जैविक खेती से नहीं जुड़ रहे हैं। प्रदेश…

बीटी ब्रिंजल परखने में समय लगेगा

बीटी बिं्रजल आधुनिक युग की बैंगन की एक संशोधित किस्म है। बैंगन महत्त्वपूर्ण सब्जी है, जो विश्व भर में खाई जाती है। भारत में दक्षिण क्षेत्र में बैंगन सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। बीटी बिं्रजल का मतलब है बैंगन की नई किस्म बायो तकनीक के माध्यम…

कृषि संग्रहालय

पहाड़ी राज्य हिमाचल को कृषि विकास के लिए भले ही देशभर में नंबर वन आंका गया हो, लेकिन यहां किसानों को अभी भी बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश में अब तक कृषि क्षेत्र से संबंधित संग्रहालय स्थापित नहीं किया जा सका है, जहां किसान अपने…

हिमाचल-इजरायल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन

इजरायल में सालाना उत्पादन दर प्रति हेक्टेयर 50 टन के आसपास रहती है, जबकि हिमाचल में 15 से 20 टन के करीब रहती है। इजरायल में आलू व सेब का रिकार्ड उत्पादन होता है। यहां 2500 हेक्टेयर भूमि में एक लाख टन सेब पैदा किया जा रहा है, जबकि हिमाचल में…

इजरायल का स्टाइल

इजरायल मॉडल यानी सीमित साधनों से उत्पादकता को कई गुना अधिक करना है। इजरायल में भी हिमाचल की भांति सिंचाई के सीमित साधन हैं। वहां 90 फीसदी सीवरेज के पानी को रिसाइकिल करके इसका 70 प्रतिशत प्रयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है। वहां ड्रिप व…

एक जैसी है जलवायु

इजरायल में हिमाचल के मुकाबले गर्मी अधिक पड़ती है। वहां सालाना बारिश की दर 800 मिलीमीटर तक आंकी गई है, जबकि हिमाचल में यह दर 940 मिलीमीटर के आसपास रहती है। प्रदेश के कम ऊंचाई वाले तथा इजरायल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलवायु में समानताएं…