विचार

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) 15 अगस्त, 1969 को शुरू हुआ इसरो का सफर नित नए मुकाम तय कर रहा है। इस मर्तबा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष विज्ञान का एक और कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। बुधवार को एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का इसरो का अभियान सफल

( वीरेंद्र पैन्यूली लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं ) आज विश्व में नदियों के अविरल प्रवाह की बात, धार्मिक कारणों से ही नहीं, वैज्ञानिक व पर्यावरणीय कारणों से भी की जा रही है। कई बने बांधों को तोड़ने की भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। कुछ देशों में बांधों को एक निश्चित समय का आयु प्रमाण

आखिर पाकिस्तान पर भारत की मोदी सरकार की रणनीति क्या है? क्या सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान को सबक सिखाया जाएगा? या पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग कर ‘आतंकी देश’ घोषित कराने की कोशिशें जारी रहेंगी? अथवा मोदी सरकार कुछ खिड़की-दरवाजे खुले रखना चाहती है, ताकि राजनयिक, सांस्कृतिक, नागरिक-दर-नागरिक संबंध बने रहें? एक तरफ आतंकी

( हेमांशु मिश्रा लेखक, पालमपुर से अधिवक्ता हैं ) अमरनाथ एवं वैष्णो देवी यात्रा का संचालन जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर की सरकार करती है, वैसे ही हिमानी चामुंडा के लिए धार्मिक यात्रा का संचालन करना चाहिए। साथ ही पालमपुर के इर्द-गिर्द गढ़ माता मंदिर, जाखणी माता, नाला मंदिर घुघर और आशा पुरी माता मंदिर का एक

( किशन सिंह गतवाल, सतौन, सिरमौर ) माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक अत्यंत दिलचस्प केस में विचार व्यक्त किया है कि जो नागरिक मतदान में भाग नहीं लेता, वह न तो सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकारी है और न ही वह सरकार से किसी प्रकार की सुविधा या छूट का पात्र। वास्तव

सोशल मीडिया नामक जिस समुदाय से हिमाचली नेताओं का याराना बढ़ रहा है, उसकी दरारें व चुनौतियां भी स्पष्ट हैं। राजनीतिक तकनीक के सोशल मीडिया का चुंबक जब टूटता है, तो एक साथ कई चाबुकों जैसा दर्द भी महसूस होगा। अपने कारणों व प्रतीकों के सोशल मीडिया में सियासी हस्तियों का संवाद और शेषांक देखा

( डा. शिल्पा जैन सुराना, वंरगल, तेलंगाना ) बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी महत्त्वपूर्ण है। यह अत्यंत दुख की बात है कि आज के मां-बाप सिर्फ किताबी शिक्षा को ही ज्यादा महत्त्वपूर्ण मानते हैं। उनका सिर्फ एक ही उद्देश्य होता है कि बच्चा परीक्षा में अच्छे नंबर लेकर आए। जनमानस में यह

( जग्गू नौरिया, जसौर, नगरोटा बगवां ) बनाते रहे नीतियां कुछ ऐसे, असफलता की देखिए अब मिसाल है। हुए लाभ कितने से इनसे अब तक, कहीं उठता नहीं देखिए सवाल है। गुटखा, खैनी तंबाकू प्रतिबंधित, मिल जाएं देखिए कमाल है। नित पाएं हर हाथ या मुंह में, बेबसा नशे से जो देखिए बेहाल हैं। नियम

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) वर्तमान में यह एक खुला प्रश्न है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था से कर वसूली बढ़ेगी या नहीं। कहावत है कि ताले शरीफों के लिए लगाए जाते हैं। चोर तो ताले को खोलना जानता ही है। इसी प्रकार कच्चे पर्चे कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए