विचार

परतंत्र भारत में लोकमान्य तिलक ने अंग्रेजों से साफ शब्दों में कहा था कि ‘स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे मैं लेकर रहूंगा।’ इसके बदले मिली उनको असंख्य यातनाएं और जेल यात्राओं की अनवरत त्रासदियां। लेकिन वे अपनी बात से अंतिम समय तक नहीं हटे तथा आजादी की अलख को जलाए रखा। उस समय

2014 में जब आम चुनाव होने थे, तब प्रधानमंत्री ने देश में हर वर्ग के अच्छे दिन लाने का वादा किया था। फिर 2019 के आम चुनाव में सरकार ने अपने अधूरे कामों को पूर्ण करने के लिए देश का सहयोग मांगा। आमजन ने मोदी सरकार पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर प्रचंड बहुमत

लब्बोलुबाब यह कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। हम कितने ही काबिल हों और कितने ही ऊंचे पद पर हों, हमें दूसरों का साथ चाहिए, सहयोग चाहिए, समर्थन चाहिए, प्रायोजन चाहिए। ऐसा नहीं है कि इनके बिना हम सफल नहीं हो सकते, लेकिन तब सफलता के शिखर छूने में कदरन लंबा समय लग सकता

बेटियों के लिए भयमुक्त वातावरण तथा बेटों के लिए संस्कार युक्त जीवन सामाजिक सौहार्द, शांति तथा समरसता के लिए बहुत ही आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति में विचारों की शुद्धता, मानसिक पवित्रता तथा आचरण में व्यावहारिकता आवश्यक है… किसी ज़माने में बहुत कम लड़कियां शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा ग्रहण करती थी। विभिन्न विभागों में महिला कर्मचारियों

शिक्षा के कर्म ने शिक्षक को भी नौकर बना दिया, वरना गुरु की पाठशाला में कभी नैतिकता भी पढ़ती थी। यहां मसला यह नहीं कि समाज के किसी एक वर्ग के कंधे पर नैतिकता सवार कर दी जाए, लेकिन कहीं तो आईने जमीर के भी रहे होंगे। काफी समय से यूजीसी स्केल को लेकर विश्वविद्यालयों

हिमाचल में पर्यटकों द्वारा हंगामा करना, तलवारें निकाल कर लोगों को डराना तथा हिंसा फैलाने की धमकियां देना आदि आम हो गया है। इससे प्रदेश में कई जगह तनाव की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। बाहर से आने वाले पर्यटक क्यों हंगामे पर उतारू हो जाते हैं, यह इन दिनों चिंतन का विषय बना हुआ

उसे पता था वह हार जाएगा, लेकिन इसके बावजूद वह उम्र भर लड़ता रहा, एक हारती हुई लड़ाई। यह लड़ाई उसकी पेट भरने की लड़ाई थी। वह भीख मांग कर पेट नहीं भरना चाहता था, काम करके इज्जत की दो रोटी खाना चाहता था कि लेकिन ये सब बातें इतनी बार दुहरायी जा चुकी हैं

मुग़ल तो मुसलमान हैं अथवा मुग़लों से मुसलमानों का कोई रिश्ता नहीं है? ओवैसी का यह सवाल फिजूल और बेमानी है। वैसे ओवैसी बहसतलब शख्स भी नहीं हैं, लेकिन संदर्भ ऐतिहासिक है, लिहाजा उसका विश्लेषण किया जाना चाहिए। ओवैसी ने हाल के उप्र चुनावों के दौरान गरज-गरज कर दावा किया था कि हमने 800 साल

इस प्रकार देखें तो वैश्विक सुरक्षा-नई विश्व व्यवस्था की कुंजी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हाथ में ही है। मोदी के दौरे से भारत-जापान संबंध मजबूत होंगे… भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के महत्त्वपूर्ण दौरे पर हैं। इस दौरे ने भारतवासियों को ‘लव इन टोक्यो’ की याद करा दी है। दोनों देशों के बीच बरसों से