विचार

गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड के बिम्ब अब भी आंखों और मानस में बसे हैं। बदलते, बुलंद और शक्तिशाली भारत के कई जीवंत दृश्य ‘कत्र्तव्य पथ’ पर देखे। सैनिकों और जवानों के बेहद रोमांचक, अभूतपूर्व, अकल्पनीय, अद्भुत और असंभव-से करतब देखे, तो आसमान में लड़ाकू विमानों की कलाबाजियां भी देखी। विभिन्न दस्तों और मोर्चों का

इस समय तीन राष्ट्र विश्व के समस्त देशों की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा बने हुए हैं। इसका एक कारण तो यह है कि ये तीनों राष्ट्र यानी उत्तर कोरिया, रूस और चीन बदनाम साम्यवाद के प्रभाव में हैं, जहां लोकतंत्र और धर्म का दम निकाल दिया जाता है। दूसरे इन राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों

अडिय़ल, कडिय़ल या जिद्दी आदमी जीवन में अक्सर पिछड़ जाते हैं जबकि लोगों को साथ लेकर चलना जानने वाले लोग सफलता के शिखर छू लेते हैं। कभी-कभी दिल की बात मान लेना भी हमारे लिए अच्छा होता है और यह प्रेरणा का एक बड़ा कारण बन सकता है। मान लीजिए, आप कोई वस्तु खरीदना चाहते

जोशीमठ जैसी आपदाओं को प्राकृतिक आपदा का नाम देने से पहले पहाड़ों पर इनसानी दखलअंदाजी से हो रही घटनाओं पर रायशुमारी होनी चाहिए। इनसानी सभ्यता के मुस्तकबिल को महफूज रखने के लिए भूगर्भ वैज्ञानिकों की नसीहत व निर्देशों को संजीदगी से लेना होगा। जोशीमठ को हर कीमत पर बचाना होगा… पृथ्वी पर कुदरत की सबसे

आधी सदी का इतिहास और सबक हिमाचल के भविष्य की कल्पना में सुक्खू सरकार के अगले पांच साल के सफर को देख रहे हैं, लिहाजा अपने पहले शासकीय संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ण राज्यत्व दिवस का शृंगार किया है। सरकार ने ‘एरिया ऑफ एक्शन’ चिन्हित करते हुए पहले ही ग्रीन राज्य बनने का लक्ष्य निर्धारित

बंधु, हम तो बकाया देने के लिए तत्पर हैं, लेकिन पिछली सरकार ‘अन्धा बांटे रेवडिय़ां मुड़-मुड़ अपनों को दे’ के अन्दाज़ में खजाना खाली कर गयी। हमने गद्दी के साथ यह खाली खजाना संभालने की विरासत पायी थी। हम अभी गद्दी सुरक्षित करने में लगे हैं, पहले अपने लिए, फिर अपने नाती-पोतों के लिए। खाली

आज हमारे देश का ‘गणतंत्र दिवस’ है। हमारा देश लोकतांत्रिक है, लेकिन गणतंत्र तब बना, जब हमने अपने संविधान को ग्रहण किया, लिहाजा आज ‘संविधान दिवस’ भी माना जाता है। भारत में संविधान और उसके नागरिक ‘सुप्रीम’ हैं, क्योंकि संविधान ‘हम भारत के लोग…’ पर आधारित है। देश के नागरिकों को मौलिक अधिकार हासिल हैं।

हमारे देश में कई राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते हैं। उनमें से एक है 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था। इस अवसर पर शत-शत प्रणाम है उन महान शहीद देशभक्तों को जिनकी बदौलत आज हम सभी एक गणतंत्र राज्य में आजादी से रह रहे हैं।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार को योजनाबद्ध ढंग से आवंटन बढ़ाना चाहिए। शिक्षा में विषमताओं को दूर करना होगा… बेशर्मी से केन्द्रित होती पूंजी और व्यापक रूप से फलती-फूलती गरीबी ने हमारे यहां जिस तरह की अश्लील गैर-बराबरी को खड़ा कर दिया है उससे निपटने की तजबीज आखिर कौन देगा? ऑक्सफैम सरीखे