विचार

शिक्षा के दायरे बदलने की उत्कंठा दिखाती सुक्खू सरकार ने खेलों में युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। शिक्षा के साथ खेलों को वरीयता देने के रास्ते पर खेल स्कूल व खेल महाविद्यालय खोलने का संकल्प, निश्चित रूप से प्रतिभा चयन तथा युवा व्यक्तित्व में निखार ला सकता है। इससे पहले प्रत्येक

आजकल टीवी चैनलों पर एक आध्यात्मिक-सा चेहरा छाया हुआ है। हालांकि वह खुद को न तो भगवान, संत-सिद्ध और न ही कोई चमत्कारी पुरुष मानते हैं। वह सिर्फ बालाजी हनुमान के भक्त हैं और उन्हीं की कृपा से सब कुछ करते हैं। वह कैंसर, लकवा, पोलियो, एड्स सरीखी गंभीर बीमारियों के इलाज का भी दावा

सुबह की बे्रकिंग बोले तो किंगों की महाकिंग खबर! अपने मोहल्ले के मोबाइल अडिक्शन जी के मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाने से उनका मोबाइलावसान हो गया। तब वे अपने मोबाइल की बैटरी चार्ज करने को बहुत फडफ़ड़ाए। उन्होंने चार्जर ढूंढने को इधर उधर बहुत हाथ पांव मारे। पर उन्हें उनके मोबाइल का चार्जर नहीं

न्यायाधीशों की नियुक्ति का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। अब केंद्रीय कानून मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह पत्र लिखकर मांग की है कि जजों की नियुक्ति में सरकार का भी हस्तक्षेप हो। जजों की नियुक्ति का मुद्दा कोई नया नहीं है। इससे पहले भी इनकी नियुक्तियों के लिए विभिन्न

समझा जा सकता है कि जीएम फसलों को अपनाकर उत्पादकता बढऩे के तमाम तर्क असत्य हैं और वास्तव में जीएम फसलों द्वारा उत्पादकता बढऩे की कोई संभावना ही नहीं है। लेकिन इसके कारण पर्यावरण, स्वास्थ्य और भारत के विदेश व्यापार में नुकसान के मद्देनजर सरकार को सत्य की जांच करनी चाहिए और जीएम फसलों को

वास्तव में आत्म सुरक्षा का अधिकार एक प्रतिरोध है और इसे अधिनियमित किया है… हर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी न किसी समय और किसी भी परिपे्रक्ष्य में गुस्सा आना स्वाभाविक है। जब गुस्सा व आक्रोश एक सीमा से ऊपर चला जाता है तो व्यक्ति का व्यवहार हिंसक हो जाता है तथा विधि द्वारा

सुक्खू सरकार के आगे बढऩे के सारे संकल्प रास्ते पिछली सरकारों की वित्तीय व्यवस्था से रू-ब-रू हैं। अब तक के इरादे कम से कम यह जाहिर कर रहे हैं कि जिस तरह शांता कुमार ने अपने विजन के साथ वित्तीय अनुशासन को अहमियत दी थी, उसी तरह मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू भी अपने खजाने की हिफाजत

बेशक दुष्प्रचार, गलत सूचना या झूठी ख़बर, भ्रामक रपटें और कथित फेक न्यूज़ आदि आधुनिक लोकतांत्रिक समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। डिजिटल दौर में यह खतरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है, क्योंकि आम आदमी की ऐसी सूचनाओं तक पहुंच बेहद आसान हो चुकी है। भारत सरकार का सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस संदर्भ में

भारत और पाकिस्तान के लोग ऐसे कई प्रधानमंत्रियों को जानते हैं जो अपनी कुर्सी पर बने रहने के लिए क्या-क्या जुगाड़ नहीं करते हैं। लेकिन यदि न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री सुश्री जसिंदा आर्डर्न का आचरण देखें तो आप बोल पड़ेंगे कि क्या प्रधानमंत्री ऐसे भी होते हैं। जसिंदा ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया