वैचारिक लेख

अशोक गौतम [email protected] वैसे उसने अपने इन व्रतों के लिए महीना पहले ही चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया था। महीना पहले ही उसने अपनी व्रतधारी सहेलियों से व्रत में व्रत के लिए उपभोग हेतु बाजार में क्या क्या नया आया है, उनसे यह पूछ इसकी लिस्ट बनानी, बतानी शुरू कर दी थी, घर के सारे

अतः कम ही सही, लेकिन श्रमिक को कुछ रोजगार मिलता रहे, इसके लिए जरूरी है कि श्रम की उत्पादकता को  बढ़ाया जाए। श्रम की उत्पादकता बढ़ाने के दो प्रमुख उपाय हैं। एक यह कि उत्तम मशीनों का उपयोग किया जाए जिससे कि उसी कुशलता के स्तर का श्रमिक अधिक उत्पादन कर सके। दूसरा यह है

देश की आज़ादी व स्वाभिमान के लिए बलिदान देकर शौर्यगाथाओं के मजमून लिखने वाले वीरभूमि के शूरवीरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। साथ ही हिमाचल रेजिमेंट भी दी जाए… देश की आजादी के बाद 15 अप्रैल 1948 को 30 पहाड़ी रियासतों के एकीकरण के साथ हिमाचल प्रदेश स्वतंत्र भारत की इकाई के रूप

अजय पाराशर लेखक, धर्मशाला से हैं दसियों बार तेल की कीमतें बढ़ने और दो बार दाम घटने के बाद जब तेल 10 पैसे सस्ता हुआ तो पंडित जॉन अली खुशी से फूले न समाए। महीनों से गैराज में बंद स्कूटर को उन्होंने धूप के दर्शन कराए। झाड़ने-पौंछने के बाद स्कूटर को स़फेद हाथी की तरह

अब देश में नई ई-कॉमर्स नीति तैयार करते समय सरकार का दायित्व है कि ई-कॉमर्स से देश की विकास आकांक्षाएं पूरी हों तथा बाजार भी विफलता और विसंगति से बचा रहे। नई ई-कॉमर्स नीति के तहत सरकार के द्वारा देश के बढ़ते हुए ई-कॉमर्स बाजार में उपभोक्ताओं के हितों और उत्पादों की गुणवत्ता संबंधी शिकायतों

जंगल में अगर फल, चारा, ईंधन, खाद, रेशा और दवाई देने वाले वृक्ष, झाडि़यां और घास लगाए जाएं तो बिना पेड़ काटे लोगों को अच्छी खासी आमदनी पैदा करके दी जा सकती है। अपने आसपास रोजी का साधन पैदा होने से लोगों में आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ती है। रोजी पर खतरे का भाव कम

निर्मल असो स्वतंत्र लेखक पार्टी की कढ़ाई में गहरा रंग उबल कर ठंडा हो चुका था और अब नेताओं को इसमें डुबो-डुबो कर यह पता लगाना था कि किस पर कितना चढ़ा है। नेता एक-एक करके आ रहे थे और डुबकी लगा रहे थे। सफेदपोश बने पार्टी अध्यक्ष के सामने नेता रंग-बिरंगे हो रहे थे।

कोविड-19 के लिए जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की बढ़ती मांग के कारण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की व्यवस्था पर बहुत मार पड़ी है और इनका संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। डब्ल्यूएचओ ने संक्रामक रोगों के संदर्भ में कहा है कि जब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बोझ पड़ता है तो वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली

सरकारी अस्पतालों में तैनात डाक्टरों के स्थानांतरण हेतु स्थानीय राजनीतिज्ञ के हस्तक्षेप पर रोक लगानी चाहिए। दवा बनाने वाली फार्मा कंपनियों द्वारा दवाइयों की मनमानी कीमत निश्चित करने पर अंकुश लगाना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की सख्त जरूरत है… समाज के व्यापक कल्याण हेतु केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत