वैचारिक लेख

लगा था इस बार शायद ऐसा नहीं होगा। पौन सदी कम नहीं होती। आदमी की जि़ंदगी हो तो इसमें लगभग खप ही जाती है। देश की हो तो भी उसे उसका रौशन काल नहीं कह सकते। अव्वल तो इनसे मिलने का मौका ही नहीं मिलता। प्रायः वह अपने हवाई मीनार में रहते हैं और इस

उन्होंने एक बार पुणे में भाषण देते हुए हिंदुत्व के बारे कहा था, ‘मैं  हिंदू  हूं, ये मैं कैसे भूल सकता हूं? किसी को भूलना भी नहीं चाहिए। मेरा हिंदुत्व सीमित नहीं है, संकुचित नहीं है, मेरा हिंदुत्व हरिजन के लिए मंदिर के दरवाजे बंद नहीं कर सकता है। मेरा हिंदुत्व अंतरजातीय. अंतरप्रांतीय और अंतरराष्ट्रीय

युवा फिल्मकार सिनेमा के लिए जमीन तलाश कर रहे हैं तो सरकार का कर्त्तव्य है कि उन्हें वे संसाधन व सुविधाएं उपलब्ध करवाने की पहल करे, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें… राजधानी में 26 से 28 नवंबर तक आयोजित हो रहे शिमला अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का यह सातवां संस्करण होगा। साल 2015

जवानी में बिगड़े और सावन में हुए सांड कभी नहीं सुधरते। वे भी जवानी के दिनों के बिगड़े हुए हैं। अभी तक तो उनमें सुधरने के कोई आसार दिख नहीं रहे, मरने के बाद सुधर जाएं तो कुछ कहा नहीं जा सकता। अपनी जवानी के दिनों में वे खूब हंगामे किया करते थे। स्कूल, कॉलेज

पशुओं की प्रजातियों पर रिसर्च के लिए सरकार को निवेश करना होगा। शाकाहारी भोजन को प्रोत्साहन देने के लिए मांस के उत्पादन में उपयोग किए गए कच्चे माल पर भारी टैक्स लगाएं तो मांस महंगा होगा, तो लोग शाकाहारी भोजन की ओर बढ़ेंगे। एलपीजी का दाम बढ़ाएं तो किसान के लिए गोबर गैस को बनाना

इसलिए वर्तमान सरकार के माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया जाता है कि व्यापक जनहित में इस नए कानून को अति शीघ्र बदल कर समाज में सदियों पुरानी रीति के अनुसार पुरुषों को पहले की तरह राशन कार्डों में मुखिया बनाया जाए, जिससे कि प्रदेश सरकार के प्रति लोगों में विश्वास दृढ़ हो सके। पंजाब में

जुम्मन मस्ती में गाते हुए तेज़ कदमों से बढ़े जा रहे थे, ‘देख अभी है कच्चा दाना, पक जाए तो खा।’ अचानक ़फुम्मन उन्हें रोकते हुए बोले, ‘अमां यार! बिना वीज़ा के कहां अमेरिका दौड़े जा रहे हो? कम से कम एक सवाल का जवाब तो देते जाओ।’ जुम्मन ने रुकते हुए उन्हें सवालिया नि़गाहों

इस समय देश में कृषि एवं ग्रामीण विकास की मजबूती के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के चार महत्त्वपूर्ण आधार उभरकर दिखाई दे रहे हैं। एक, जन-धन योजना के माध्यम से छोटे किसानों और ग्रामीण गरीबों का सशक्तिकरण। दो, कृषि क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के कार्यक्रम। तीन, कृषि संबंधी नवाचार एवं शोध से

जहां देश को विकास की राह पर आगे बढ़ाने के अनेकों विषयों पर चर्चा हो सकती है, वहीं पर सभी राष्ट्रीय डिजिटल चैनलों, प्रिंट मीडिया तथा सोशल मीडिया पर इसी विवादित विषय पर वाक युद्ध हो रहा है… भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में प्रत्येक नागरिक को वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता