वैचारिक लेख

( डीआर सकलानी  लेखक, सरकाघाट, मंडी से हैं ) पर्यटन विकास हेतु  हमें गांवों में को मूलभूत सुविधाओं का नेटवर्क खड़ा करना होगा। इन गांवों में मनोरंजन पार्क, पार्किंग सुविधा, व्यवस्थित बाजार, सड़क मार्ग, मेले, उत्सव, समारोह, स्केटिंग रिंग, सिनेमा हाल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो पर्यटक खुशी-खुशी वहां जाना चाहेगा… हिमाचल की सांस्कृतिक,

( कंचन शर्मा लेखिका, स्वतंत्र पत्रकार हैं ) कचरा प्रबंधन के लिए जगह-जगह रिसाइकिलिंग स्टेशन बनाना, जैविक कचरे को खाद में परिवर्तित करने के लिए आधुनिक संयंत्रों का बंदोबस्त, नई डंपिंग साइट तैयार करना, सफाई व्यवस्था हेतु कर्मचारियों की तैनाती की पहल बजट से हो। साथ ही नए शौचालयों, स्नानागारों व सीवरेज व्यवस्था के लिए

( ललित गर्ग लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं ) कब तक नारी के अस्तित्व एवं अस्मिता को नौचा जाता रहेगा? कब तक खाप पंचायतें नारी को दोयम दर्जे का मानते हुए तरह-तरह के फरमान जारी करती रहेगी? भरी राजसभा में द्रौपदी को बाल पकड़कर खींचते हुए अंधे सम्राट धृतराष्ट्र के समक्ष उसकी विद्वत मंडली के सामने

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं ) अपने पुराने ऐश्वर्य के महिमामंडन, अपनी आंतरिक जनता का दमन और बाहरी जनता को जोड़ने में असफलता के कारण हम गुलाम हुए थे। हमारे सामने चुनौती रोम जैसे हश्र से बचने की है। मात्र मध्यम वर्ग के प्रसन्न होने से हमारी सभ्यता सफल नहीं

( रमेश चंद्र लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं ) प्रदेश में सशक्त पुरातत्त्व विभाग के बिना उपेक्षित धरोहरों की सुध कौन लेगा या ले रहा है? कला पोषक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अपेक्षा रहेगी कि वह इस संदर्भ में हिमाचल पुरातत्त्व विभाग की स्थापना का मार्ग करेंगे। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए अतिरिक्त संग्रहालयों की

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं हम लंबे वक्त से आपस में मिल-जुलकर रहते आए हैं। हालांकि हिंदुत्व के प्रभाव के बावजूद भारत के लोग इस बात को शिद्दत के साथ महसूस करने लगे हैं कि उन्हें सब मतभेद भुलाकर एक होकर रहना होगा, जैसा कि सदियों पहले के हमारे पूर्वज रहा करते थे। मौजूदा

( अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं ) बड़ी तेजी से विकसित हो रहे हमारे कस्बों, शहरों में छोटे उद्यमियों को लघु उद्योग लगाने हेतु प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे अपने यहां पांच-दस बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान कर सकें। इसके लिए इन उद्यमियों को रियायती दरों पर ऋण सुविधाएं और टैक्स माफी, बिजली-पानी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) परशुराम की धरती केरल में पिछले अनेक सालों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता साम्यवादी हिंसा के शिकार हो रहे हैं। यह असहिष्णुता केरल की धरती पर देखी जा रही है, जहां से कभी आदि शंकराचार्य शास्त्रार्थ का अस्त्र लेकर निकले थे, लेकिन इन साम्यवादियों के लिए

कर्म सिंह ठाकुर (लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं) सरकार उद्यमियों को जितना मर्जी प्रलोभन दे, लेकिन जब तक नियमों की धरातलीय पहुंच सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक प्रदेश उद्योगों की स्थापना का सुनहरा अध्याय नहीं लिख सकता। इस संदर्भ में यदि प्रदेश सरकार सफलता हासिल कर लेती है, तो प्रदेश की माली हालत तो सुधरेगी