वैचारिक लेख

(प्रो. एनके सिंह, लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं) मिस्र की जनता ने तानाशाही के शासन को सहा है, लेकिन वहां इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 20 मिलियन उपभोक्ता हैं। इसके जरिए ही सरकार द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार के कारण पनपी अशांति का संदेश फैलाया गया… मिस्र में जो कुछ हुआ

(भूपिंदर सिंह, लेखक, पेनल्टी कार्नर खेल पत्रिका के संपादक हैं) भारतवर्ष के अधिकांश प्रशिक्षण यूरोप या अमरीका में लगते हैं। अगर हिमाचल के पास राष्ट्रीय खेलों के लिए विश्वस्तरीय खेल सुविधा होगी, तो यह सब हिमाचल में  हो सकता है… झारखंड की राजधानी रांची सहित अन्य शहरों में आयोजित हो रहे 34वें राष्ट्रीय खेलों ने

(डा. अश्वनी महाजन, लेखक, पीजी डीएवी कालेज दिल्ली  विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता हैं) कुछ वर्ष पहले तक अनाज में आत्मनिर्भर देश अब दुनिया के दूसरे मुल्कों से आनाज आयात करने के लिए बाध्य हो रहा है… पिछले लगभग तीन वर्षों से महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। दिसंबर, 2010 में महंगाई की दर

(डा. विनोद कुमार, लेखक, एमएलएसएम महाविद्यालय  सुंदरनगर, मंडी में प्रवक्ता भौतिक हैं) क्या मुख्याध्यापकों की सीधी भर्ती आमूलचूल परिवर्तन कर देगी? मेरा विचार है कि इसे लागू करने से पहले गहन विचार करना चाहिए, ताकि यह भी कहीं दूसरी बिना विचार से की गई भर्तियों में किसी खेल का हिस्सा न बने… भारत में वर्तमान

(पीके खुराना,लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार हैं) हर साल देश में करीब 35 लाख करोड़ रुपए की ब्लैक इकॉनमी तैयार होती है और इसका तकरीबन 10 प्रतिशत यानी करीब तीन लाख करोड़  सालाना काले धन के रूप में मारीशस, बहामास और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जमा होता जा रहा है… राजाओं-महाराजाओं के समय से ही विश्व

(सरताज सिंह, लेखक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चंडी (अर्की) जिला सोलन में प्रवक्ता अर्थशास्त्र हैं) कृषि पर आधारित उत्पादन हेतु ऋण एवं साख संबंधी सुविधाओं की व्यवस्था में नियमों को लचीला बनाया जाए, ताकि ग्रामीण युवाओं की कृषि एवं पशुपालन की ओर ध्यान केंद्रित किया जा सके… भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में सदैव यह कहा

(राजेंद्र पंडित, लेखक, गांव गोंदपुर बनेहड़ा, जिला ऊना के पूर्व उपप्रधान हैं) हैरानी की बात है कि गौवंश की ऐसी उपेक्षा क्यों की जा रही है। गौवंश के संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर भी अभी तक कोई ठोस नीति तथा कानून नहीं बन पाया है, जिससे गौवंश को खुला छोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त

(डा. भरत झुनझुनवाला,लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं) भारत और चीन समेत दूसरे विकासशील देशों की परिस्थिति तुलना में सुदृढ़ रहेगी। 2011 में इन पर दो विपरीत प्रभाव पड़ेंगे। पश्चिमी देशों के संकट के गहराने से इन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा… कई विश्लेषज्ञों ने कहा है कि आने वाले समय में विश्व अर्थव्यवस्था में सुधार

(डा. वेद प्रताप वैदिक, लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं) इसरो और ‘देवास’ ने मिलकर देश को दो लाख करोड़ से भी ज्यादा चूना लगा दिया। इतना ही नहीं ‘इसरो’ के पूर्व सचिव और देवास के वर्तमान चेयरमैन चंद्रशेखर ने समझौता कुछ इस ढंग से लिखवाया कि वह 20 साल की ‘लीज’ कभी