वैचारिक लेख

(खुशवंत सिंह, लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं ) मैं उम्मीद कर रहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से नवाजा जाएगा। वह अब कोई राजनीतिक ताकत नहीं रहे हैं लेकिन भाजपा के शीर्ष पुरुष हैं वह श्रेष्ठ प्रधानमंत्री थे। उनके नाम के साथ कोई स्कैंडल नहीं जुड़ा… हर साल गणतंत्र दिवस पर मैं ऐसे

(नरेंद्र कुमार, लेखक, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कांगड़ा में अधीक्षक ग्रेड-दो हैं) सरकार कोई भी हो उसमें सक्रिय नेतागण मंच पर भाषण इस प्रकार से देते हैं, मानो अभी 85वां संशोधन लागू कर दिया हो, लेकिन जैसे ही भाषण समाप्त होता है 85वां संशोधन भी समाप्त हो जाता है… भारतीय संविधान के अंतर्गत यह

(भूपिंदर सिंह, लेखक, पेनल्टी कार्नर खेल पत्रिका के संपादक हैं) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना बेहद कठिन कार्य है अगले खेल 2012 में केरल कर रहा है, अच्छा होगा इन खेलों के बाद 2012 के राष्ट्रीय खेलों के लिए पूरे वर्ष का प्रशिक्षण शिविर शुरू कर दिया जाए… बहुत लंबे समय से स्थगित हो रहे

(प्रो. एनके सिंह, लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं) कामयाब और अमीर होने के साथ यह भी जरूरी है कि समाज ने जो कुछ आपको दिया है, आप भी उसे समाज के साथ बांटें। वह अपनी आधी संपत्ति, जन हितैषी कामों में दान देंगे… हम उस संकट के दौर से गुजर रहे

(ऋतु शर्मा,लेखिका, शरण कालेज ऑफ एजुकेशन फॉर वूमेन में प्रवक्ता हैं) प्रदेश में कन्या शिशु दर में बढ़ोतरी हुई है, जो सराहनीय है, परंतु हाल ही में हुए सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि पहाड़ी क्षेत्रों की अपेक्षा निचले क्षेत्रों में कन्याओं की संख्या कम पाई गई है… भारतीय समाज में नारी को आदिकाल

(डा. अश्वनी महाजन, लेखक, पीजी डीएवी कालेज दिल्ली  विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता हैं) यह स्पष्ट है कि कम से कम 1500 अरब डालर स्विस और दूसरे बैंकों में जमा हैं, जिनके बारे में कहा जा सकता है कि यह धन अनैतिक रूप से भारत से ले जाकर जमा किया गया है… पिछले कुछ समय

(प्रकाश चौधरी, लेखक, हिमाचल परिवहन सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण मंच के कार्यकारी अध्यक्ष हैं) क्या सरकार परिवहन कर्मचारियों को उनकी निष्ठा और साहस का यह इनाम दे रही है कि उनके सभी आर्थिक लाभों पर निगम में घाटे का रोना रोकर रोक लगा दी जाए… प्रदेश में हिमाचल परिवहन निगम कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करते

(पीके खुराना, लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार हैं) अभी तक  वैकल्पिक पत्रकारिता को सिटीजन जर्नलिज्म से ही जोड़कर देखा जाता रहा है, जबकि वस्तुस्थिति इसके विपरीत है। बहुत से अनुभवी पत्रकारों के अपने ब्लॉग हैं जहां ऐसी खबरें और विश्लेषण उपलब्ध हैं जो अन्यत्र कहीं प्रकाशित नहीं हो पाते… पत्रकारिता में हम अब एक नई अवधारणा

सूचना का अधिकार 2005  कुंद करने की शुरुआत (डा. विनोद कुमार, लेखक, सुंदरनगर में भौतिक शास्त्र के प्रवक्ता हैं) शुरुआती दौर में इस अधकार के प्रयोगात्मक पक्ष के अच्छे परिणाम भी आए हैं, परंतु जैसे-जैसे इसका प्रयोग बढ़ रहा है, सूचना देने वाले कर्मचारी बचाव की परिभाषाएं प्रयोग में ला रहे हैं… आज विश्व भ्रष्ट