वैचारिक लेख

– रमन कुमार गुप्ता, लेखक, हिमाचल प्रदेश, राजकीय अध्यापक संघ  के पूर्व मुख्य संगठन सचिव  हैं  इस फर्जीबाड़े को किसी निष्कर्ष तक पहंुचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। वैसे भी प्रदेश सरकार की जवाबदेही बनती है कि वह राजनीतिक स्वार्थों से उबरकर पूरा सच सामने लाए, चाहे वह कितना भी कड़वा

– खुशवंत सिंह, लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं हमारा सरोकार इस बात से होना चाहिए कि हम इस धरती पर अपने जीवन में क्या करते हैं। मैंने जिंदगी के बारे में जो कुछ सुना है, वह बीच की बात है। न तो इसकी शुरुआत जानता हूं, न अंत… मेरा सुझाव है कि धार्मिक त्योहारों पर मंदिर,

– ओंकार ठाकुर, लेखक, उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग शिमला के पूर्व सदस्य हैं अब आलम यह है कि अगर कोई दुकानदार कम से कम लाभ पर भी चीज बेचता है, तो खरीददार फिर भी यही कहता है कि यह मुझे लूट रहा है। जब महंगाई आसमान छूने लगी, तो उसका भी कारण दुकानदार ही बना…

– प्रो. एनके सिंह, लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं दुर्भाग्य है कि हमारे प्रधानमंत्री जो अपने निजी जीवन में बेशक ईमानदार हैं, लेकिन बुराई से निपटने के लिए वह जरूरत से भी अधिक भद्र और नेक हैं… हाल ही में संसद में जो शोर-शराबा हुआ है, उससे प्रशासन की सबसे भद्दी

– भूपिंदर सिंह, लेखक, पेनल्टी कार्नर खेल पत्रिका के संपादक हैं अगर पंजाबी विश्वविद्यालय की तरह खेलों को बढ़ावा देना है, तो हमें अधिक से अधिक खेल प्रशिक्षक तथा खेल विंग राज्य में चलाने होंगे, खिलाडि़यों के लिए वजीफे का प्रबंधन करना होगा, जिससे वे अपनी खुराक तथा खेल किट खरीद सकें… जहां स्कूली खेलों

– डा. वेद प्रताप वैदिक, लेखक, विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं म्यांमार की निंदा चारों तरफ से हो रही है। इस मुद्दे पर चीन के अलावा कोई भी राष्ट्र उसका समर्थन नहीं कर रहा है। प्रतिबंधों का सीधा असर फौज पर तो कुछ नहीं है, लेकिन म्यांमार की जनता दिनोंदिन निर्धन और असहाय होती

-प्रीतम चंद, लेखक, गांव व डाक घर-मंदल, कांगड़ा से हैं  विद्यार्थियों के लिए शिक्षक देने में 50 प्रतिशत अंक सीमा या मैरिट से कोई समझौता न हो तभी देश के उज्ज्वल भविष्य की आशा की जा सकती है…   प्रदेश सरकार ने योग्य शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से सभी

– डा. अश्विनी महाजन, लेखक, पीजीडीएवी कालेज दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं टेलिकाम क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास के फलस्वरूप भ्रष्टाचार के ज्यादा अवसर भी वहीं सबसे ज्यादा हैं। लगभग दो दशक पहले केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम से वर्तमान संचार मंत्री ए राजा तक के घोटालों की कहानी इस बात को साबित करती है… पिछले

– गुरुदत्त शर्मा, लेखक, हिमाचल शिक्षक महासंघ के प्रदेश महामंत्री हैं स्कूल शिक्षा बोर्ड की आंतरिक व्यवस्था सुधारने के लिए उसकी कार्यप्रणाली पर आमूल चूल परिवर्तन करना पड़ेगा और उसके लिए जरूरत पड़ेगी इच्छा शक्ति की जो सरकार ने फर्जीबाड़े की जांच बिठा कर पूरी कर दी है…   बिना परीक्षा दिए प्रमाण पत्र हासिल