वैचारिक लेख

(डा. भरत झुनझुनवाला, लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं) नेता और व्यापारी के धर्म में अंतर्विरोध रहता है। नेता की कमाई जनता का समर्थन होता है, जबकि व्यापारी की कमाई जनता के शोषण से होती है। भूमि आबंटन से हुई बदनामी से व्यापारी नहीं घबराता है, चूंकि उसे सद्नामी और बदनामी से कोई सरोकार नहीं

(कैलाश चंद भार्गव, लेखक, हिमाचल प्रदेश सी एंड वी अध्यापक संघ के पूर्व प्रधान हैं) शिक्षा विभाग कुछ समय तक इन नियमों को लागू न कर, अध्यापकों के विभिन्न संगठनों को विश्वास में लेकर भाषायी अध्यापकों से चल रहे अन्याय पर उदारता दिखाते हुए नए संशोधन में आवश्यक सुधार कर लागू करने की पहल करे…

(रमन कुमार गुप्ता,लेखक, पांगना जिला मंडी से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं  ) एक बात अवश्य जहन में रखें कि जब विकास कार्य नहीं हो पाते या विकास के नाम पर धन का दुरुपयोग होता है तथा लोग अपने प्रधान, उपप्रधान और पार्षद से जवाब तलब नहीं कर पाते, तो उनकी कार्यशैली आम जनमानस को हताश करती है…

(डा. वेद प्रताप वैदिक, लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं) मैं तो यहां तक कहूंगा कि आरिफ जी ने यह संग्रह छपवा कर इस्लाम और मुसलमानों की बड़ी सेवा की है। इस पुस्तक की श्रेष्ठता का प्रमाण तो यह तथ्य है कि कुछ ही महीने में इसका दूसरा संस्करण भी बाजार में आ

(खुशवंत सिंह, लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं) आतिश को अपने मां-बाप के नैन-नक्श मिले थे। उसके बहुत से प्रशंसकों में ब्रिटिश शाही परिवार की एक युवती भी थी। उसने उसे सबसे सुंदर व्यक्ति कहा था… सलमान तासीर की निर्मम हत्या के बारे में लिखते समय मैंने उनके बेटे आतिश की पहचान की समस्या को नजरअंदाज कर

(शिव कुमार शर्मा, लेखक, पेंशनर्ज, वेलफेयर एसोसिएशन मंडी, जिला मंडी से महासचिव हैं) पंजाब सरकार द्वारा उक्त सभी लाभ एवं पेंशन बढ़ोतरी और अतिरिक्त कई लाभ अपने सूबे के सभी पेंशनरों को पहले ही प्रदान किए जा चुके हैं, परंतु हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों को उक्त सभी बढ़े हुए लाभ लिखित प्रतिबद्धता के बावजूद पूर्णतः

(भूपिंदर सिंह, लेखक, पेनल्टी कार्नर खेल पत्रिका के संपादक हैं) जो खिलाड़ी खेल छात्रावासों के बाहर रह कर अभ्यास करता है, उसे लगभग दो लाख रुपए का वजीफा चाहिए होता है, तभी वह राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकता है। हिमाचल का खेल विभाग तो तीन हजार रुपए देकर अपना पीछा छुड़ा लेता है… खिलाड़ी

(प्रो. एनके सिंह, लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं) मंत्रिमंडल में फेरबदल का मकसद यह होना चाहिए, जिससे प्रशासन व्यवस्था में सुधार हो और देश जो घोटालों और कुशासन की मार झेल रहा है, उसे बचाने के लिए पदों पर नए व्यक्ति नियुक्त किए जाएं… मुझे हमेशा हैरानी होती है कि जिस

(सुशील राजेश, लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं) जिन सपनों और कल्पनाओं के साथ गणतंत्र की संरचना की गई थी, वे आज कायम हैं या चूर-चूर होकर अस्तित्वहीन हो चुके हैं? यथार्थ यही है कि हमारे गणतंंत्र की बुनियाद संविधान संकट और सवालों की स्थिति में है… 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय उत्सव में शामिल होने