वैचारिक लेख

– प्रो. एनके सिंह, लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हमने धीरे-धीरे उन प्रतीक चिन्हों को नष्ट कर दिया, जिन्हें बनाने में वर्षों लग गए थे। किसी चीज को नष्ट करने का यह सबसे सटीक तरीका है। स्विस एयर आज भी स्विस एयर है, जिसमें रेडक्रास के लोगो हैं। इसी तरह ब्रिटिश

– भूपिंदर सिंह, लेखक, पेनल्टी कार्नर खेल पत्रिका के संपादक हैं स्कूलों को शारीरिक शिक्षा के प्रवक्ता मिल गए, यह अच्छी बात है, मगर डीपीई का पद भी स्कूल में बचा रहना चाहिए, ताकि खेल सामान्य फिटनेस तथा अन्य युवा गतिविधियों को भी कोई करवाने वाला हो… न्यायालय ने शिक्षा विभाग को एक फैसले में

– डा. अश्विनी महाजन, लेखक, पीजीडीएवी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर अमरीका में आया आर्थिक संकट जो वहां के बैंकों और अन्य वित्त संस्थाओं की अनुशासनहीनता का परिणाम है, अमरीका को संरक्षणवादी नीतियां अपनाने के लिए बाध्य कर रहा है…   अमरीका के राष्ट्रपतियों का भारत में आना भारत के लिए कोई नई बात

– पिंकी रमौल, लेखिका, त्रिवेणी स्कूल आफ एक्सीलेंस, पांवटा साहिब में प्रिंसीपल हैं इस योजना का असर सबसे अधिक लड़कियों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों में देखने को मिला है। योजना से बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन और उपलब्धियों में काफी सुधार हुआ है… विश्व के सबसे बड़े पोषाहार कार्यक्रम राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन योजना

– सुशील राजेश, लेखक, पत्रकार हैं अमरीका अभी तक पाक को 20 अरब डॉलर की मदद दे चुका है और अरबों का गोला-बारूद, विमान, अलग…।  तो राष्ट्रपति ओबामा के पाकिस्तान  को ‘आतंकी देश’ करार दिए जाने से भारत को क्या हासिल होता…?   दक्षिण एशिया में अमरीका कई विरोधाभासों के बीच घिरा है। एक ओर

– अजय पराशर, लेखक, जिला लोक संपर्क अधिकारी हैं प्रदेश में जैविक या ऋषि खेती की अपार संभावनाएं विद्यमान होने के बावजूद कुछ किसान या बागबान लालच में अंधे होकर, न केवल हानिकारक रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं, बल्कि आक्सीटॉसिन जैसे घातक इंजैक्शन का भी सहारा ले रहे हैं…   बाजार

– डा. भरत झुनझुनवाला, लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं परियोजना से समाज को भारी नुकसान होता है। नदी को टनल में बहाने से पानी का धरती, हवा एवं सूक्ष्म प्राणियों से संपर्क कट जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता में गिरावट आती है… हमारे पूर्वजों ने आचरण का मंत्र दिया था ‘धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष’ यानी धर्म के

– नरेंद्र कुमार, लेखक, कार्यालय खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, कांगड़ा ग्रेड-दो में अधीक्षक हैं आज के युग में कार्यालयों का प्रत्येक कार्य सरकार एवं विभाग, मशीनरी के प्रयोग द्वारा ही करवाना चाहता है, लेकिन अगर मशीनरी पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं करवाई जाती है तथा मशीनरी चुस्त-दुरुस्त नहीं रखी जाती है, तो समस्या का हल नहीं

– राजीव रंजन तिवारी, लेखक, मुजफ्फरनगर से पत्रकार हैं  पहले मुस्लिमों को कश्मीर के बारे में बात करने से डर था कि उन्हें भी कश्मीरी आंदोलनकारियों के साथ न जोड़ दिया जाए, लेकिन अब कश्मीर तथा अयोध्या जैसे विवादास्पद मसलों पर फिर से मंथन का एक नया दौर शुरू हआ है…   मौजूदा  कश्मीर समस्या