वैचारिक लेख

– डा. भरत झुनझुनवाला, लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं परियोजना से समाज को भारी नुकसान होता है। नदी को टनल में बहाने से पानी का धरती, हवा एवं सूक्ष्म प्राणियों से संपर्क कट जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता में गिरावट आती है… हमारे पूर्वजों ने आचरण का मंत्र दिया था ‘धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष’ यानी धर्म के

– नरेंद्र कुमार, लेखक, कार्यालय खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, कांगड़ा ग्रेड-दो में अधीक्षक हैं आज के युग में कार्यालयों का प्रत्येक कार्य सरकार एवं विभाग, मशीनरी के प्रयोग द्वारा ही करवाना चाहता है, लेकिन अगर मशीनरी पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं करवाई जाती है तथा मशीनरी चुस्त-दुरुस्त नहीं रखी जाती है, तो समस्या का हल नहीं

– राजीव रंजन तिवारी, लेखक, मुजफ्फरनगर से पत्रकार हैं  पहले मुस्लिमों को कश्मीर के बारे में बात करने से डर था कि उन्हें भी कश्मीरी आंदोलनकारियों के साथ न जोड़ दिया जाए, लेकिन अब कश्मीर तथा अयोध्या जैसे विवादास्पद मसलों पर फिर से मंथन का एक नया दौर शुरू हआ है…   मौजूदा  कश्मीर समस्या

– कैलाश चंद भागर्व, लेखक, डोमेहर, अर्की से प्रगतिशील किसान र्हैं यदि एपीएल व बीपीएल सब परिवारों को छह माह का गेहूं अग्रिम दे दिया जाता, तो देश भंडारण समस्या से निजात पा सकता था और पारिवारिक तौर पर अन्न का भंडारण एफसीआई से अच्छा होता…   विश्व की आधी संख्या अन्न से ही जीवन

– प्रो. एनके सिंह, लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हमारे देश के जाने-माने लोगों को कई मामलों में कुछ भी कहने का लाइसेंस मिला हुआ है और वे किसी की भी भावनाओं की कोई परवाह न करते हुए कुछ भी कह देते हैं। प्रसिद्ध लोगों को मीडिया के समक्ष शालीनता और

– भूपिंदर सिंह, लेखक, पेनल्टी कार्नर खेल पत्रिका के संपादक हैं साई खेल छात्रावास धर्मशाला तथा बिलासपुर की लड़कियां तथा लड़के इस प्रतियोगिता में कहीं भी नजर नहीं आए। लाखों रुपए प्रति धावक प्रतिवर्ष खर्च करके मैदान में धावकों का लचर प्रदर्शन अच्छी बात नहीं है… खेलों की जननी एथलेटिक्स की राज्य स्तरीय स्कूली एथलेटिक्स

– डा. वेद प्रताप वैदिक, लेखक, भारतीय-विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं जितने अशिक्षित लोग भारत में हैं, दुनिया के किसी भी देश में नहीं हैं। प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा जितना सच बोलता है उससे ज्यादा झूठ बोलता है… भारत किधर जा रहा है, कुछ समझ में नहीं आ रहा! इसे कौन चला रहा

– डा. आरसी मिश्रा, लेखक, पूर्व प्रोफेसर और प्रगतिशील बागबान हैं वर्तमान सरकार ने ‘पोलिथीन’ पर प्रतिबंध लगा रखा है। थोड़ी समझ तो लगाई होती कि इसका कार्यान्वयन कैसे होगा। हंसी का विषय है कि सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बांटा जाने वाला राशन (दालें, तेल व नमक) पोलिथीन के लिफाफों में बंद होकर 

– राजीव रंजन तिवारी, लेखक, मुजफ्फरनगर से पत्रकार हैं पाकिस्तान अमरीका पर यह दबाव बना रहा है कि ओबामा भारत पहुंचकर किसी सामरिक गठजोड़ की घोषणा न करें वरना वह  चीन की शरण में चला जाएगा। वहीं ओबामा का प्रयास यह है कि कश्मीर समस्या का समाधान हो जाए, तो पाकिस्तान के पास भारत का