दिल्ली में दंगा-फसाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार सरकार की अपनी समस्या होती है। शांति से बैठे लोगों को कुछ कहो तो पूरी ब्रिगेड खड़ी हो जाती है। प्रश्न पूछती है कि क्या अब इस लोकतांत्रिक देश में सरकार के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन का…

अमरीका का दोहरा चरित्र

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार तर्क दिया जा सकता है कि करोड़ों हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनों की भारतीय नागरिकता बलपूर्वक छीनने वाला अधिनियम तो ब्रिटेन की संसद ने पारित किया था, इसलिए इसमें भारतीय शासकों या शासक दलों का…

कांग्रेस का आत्ममंथन

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने आम आदमी पार्टी को जीत की बधाई दी और इस बात पर खुशी जाहिर की कि केजरीवाल ने भाजपा को हराकर एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय कार्य किया है। चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया क्या…

पाकिस्तान की असलियत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पूर्वी बंगाल के हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और उन्हें बलपूर्वक मतांतरित किए जाने से पाकिस्तान के विधि मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल भी सकते में आ गए थे। वे बार-बार प्रधानमंत्री से इसे रुकवाने के…

नागरिकता को लेकर मुगलों की एंट्री

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार सोनिया कांग्रेस और कम्युनिस्ट इस बम विस्फोट की सामूहिक जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे या नहीं फिलहाल नहीं कहा जा सकता, लेकिन ओवैसी बंधुओं ने एक नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना था कि हम मुसलमानों ने…

नागरिकता कानून के विरोधी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार ब्रिटिश सरकार का हित इसमें था कि एक नया इस्लामी देश बना कर उसे इस्लामी देशों की कमान सौंपी जा सके और उसका उपयोग भारत में रूसी साम्यवाद को रोकने के लिए किया जाए। इसके साथ ही भारत का एक स्थायी…

विरोध की लक्ष्मण रेखा क्या हो?

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध करते-करते विपक्षी दलों का नेतृत्व कर रही ममता बनर्जी विरोध की वह लक्ष्मण रेखा पार कर गई लगती हैं। पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बांग्लादेश, पाकिस्तान…

शिक्षा में भारतीय भाषाओं की महत्ता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार व्यक्तिगत रूप में मुझे संस्कृत भाषा पर बहुत अभिमान है। यह भाषा मुझे ठीक से आनी चाहिए, ऐसा मुझे आज भी लगता है। मैं अब खुद ही संस्कृत पढ़ता हूं। अपने इस परिश्रम के कारण मैं थोड़ी-थोड़ी संस्कृत…

जयराम सरकार के दो साल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार जयराम सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि उसने विभिन्न स्तरों पर फैली भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ने की दिशा में जाने का संकल्प ही नहीं लिया बल्कि उस दिशा में व्यावहारिक रूप से काम करना भी…

नागरिकता विधेयक पर सियासत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार जुलाई 1947 में इंग्लैंड की संसद ने भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित किया जिसमें भारत के कुछ हिस्से को काट कर उसे पाकिस्तान का नाम दे दिया गया। दुर्भाग्य से नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने…

महात्मा गांधी और कश्मीर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार डोगरा शासक महाराजा प्रताप सिंह ने महात्मा गांधी को 1915 में श्रीनगर आने का निमंत्रण दिया था। ध्यान रहे महाराजा प्रताप सिंह को ब्रिटिश सरकार प्रताडि़त ही नहीं कर रही थी बल्कि उनको पदच्युत करने…

मनमोहन सिंह ने चुकाया कर्ज

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार कांग्रेस और भ्रष्टाचार लगभग पर्यायवाची ही बन गए हैं। सत्ता कांग्रेस की होगी तो जाहिर है वरिष्ठ से लेकर कनिष्ठ कांग्रेसी सत्ताधारी अपने- अपने रुतबे और योग्यता के हिसाब से घोटालों में लग ही…

महाराष्ट्र की नई सरकार

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार जाहिर है मुस्लिम अंडरवर्ल्ड को हिंदू के उत्तर भारतीय होने सा दक्षिण भारतीय होने से कोई मतलब नहीं था। उस कालखंड में शिव सेना ने अपने चिंतन व दृष्टि का विस्तार करना शुरू किया व संगठित मुस्लिम…

नालंदा परंपरा को संभालने के प्रयास

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार मगध से कुछ मील की दूरी पर सटे हुए बिहार शरीफ में ओदांतपुरी या उदांतपुरी नाम से विश्व प्रसिद्ध महाविहार स्थित था। नालंदा के पास ही राजगृह जिसे आज राजगीर कहा जाने लगा है , महात्मा बुद्ध का कर्म…

राहुल गांधी का राफेल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार कुछ लोग राफेल जहाज खरीदने की प्रक्रिया का मामला उच्चतम न्यायालय में भी ले गए। उनका कहना था कि उच्चतम न्यायालय अपनी निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया की जांच करवाए। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में…