साम्राज्यवाद को पोषित करता सूचना तंत्र

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) अमरीकी समाचार माध्यम दोहरे उद्देश्य से कार्य करते हैं। पहला उद्देश्य, अन्य देशों को वही सूचनाएं दी जाएं, जिस प्रकार की सूचनाओं से सृमद्ध देशों के हितों की पूर्ती होती हो। द्वितीय,…

हाशिए पर विकास मॉडल की मूलभूत बहस

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) भारत में विकास का लक्षण है ज्यादा से ज्यादा भौतिक सुविधाओं की लालसा पर ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण रखना। उतना भोग करना, जितना इस शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। भारत में…

पंजाबी एकता के मुद्दई की विदाई

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) ऊपर से देखने पर पंजाब शांत है, लेकिन पंजाब के अंदर एक दूसरे प्रकार का आतंकवाद जन्म ले चुका है। बहुत ही सावधानी से चुन कर किसी को मारना। अंग्रेजी में इसे टारगेट किलिंग कहा जा सकता…

तिब्बत के मार्फत यूरोप की पड़ताल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) सम्मेलन का आयोजन यूरोपीय संसद में ही काम कर रहा तिब्बत इंट्रेस्ट ग्रुप करवा रहा था । उनके साथ कुछ और समूह भी जुड़ गए थे । जिनमें से आईसीटी प्रमुख कहा जा सकता है । आईसीटी यानी…

सवालों में यूएन मिलिट्री ऑब्जर्वर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) हुर्रियत कान्फ्रेंस और आतंकवादी / अलगाववादी दोनों ही जानते हैं कि मिलिट्री ऑब्जर्वर का राजनीतिक उपयोग कैसे करना है। यही कारण है कि हुर्रियत कान्फ्रेंस और मीरवायजों ने कुछ साल…

आतंकियों की भाषा में संवाद है कहां !

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) महबूबा मुफ्ती ठीक कहती हैं कि इन प्रदर्शनों में आम जनता दिल से शामिल नहीं है, लेकिन इससे कौन इनकार कर सकता है कि दक्षिण कश्मीर की आम जनता को आतंकवादियों ने बंधक बनाया हुआ है।…

शिक्षा के टूटे पुल जोड़ सकती है संस्कृत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) संस्कृत का सबसे बड़ा लाभ तो यही है कि यदि उसको जानने वाले और व्यवहार में लाने वाले लोग तैयार होते हैं, तो उन लाखों पांडुलिपियों को पढ़ा जा सकता है जो अभिलेखागारों में दीमक का…

आतंकियों को महबूबा की खरी-खरी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) महबूबा ने एक बहुत ही तल्ख प्रश्न किया। कहा जाता है कि बच्चे पेलेटगन का शिकार हो रहे हैं, लेकिन कोई बताएगा कि ये बच्चे क्या सुरक्षा बलों की चौकियों पर दूध लेने जाते हैं? महबूबा मुफ्ती…

किस दरबार के नवरत्न हैं दिग्विजय

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) दिग्विजय सिंह का कहना है कि कश्मीर के एक हिस्से पर भारत ने कब्जा किया हुआ है और दूसरे हिस्से पर पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है। इसलिए सरकार को वहां के लोगों से बात करनी चाहिए। कश्मीर…

घातक है राजनीति और आतंक का घालमेल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) आज पंजाब को सबसे ज्यादा जरूरत चाक चौबंद कानून व्यवस्था की है। विकास भी तभी संभव है यदि राज्य की कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होगी। सोनिया कांग्रेस पंजाब में आतंकवाद की घटनाओं पर…

मुखर्जी की दृष्टि ही देगी समाधान

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) डा. मुखर्जी शायद उसी समय समझ गए थे कि यदि भारत की सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करनी है और शासन को भारतीय मूल्यों के अनुसार ढालना है, तो नेहरू की पश्चिमोन्मुखी कांग्रेस के मुकाबले…

यह महबूबा की श्रद्धांजलि तो नहीं!

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) महबूबा मुफ्ती को बुरहान वानी को लेकर चिंता तो हो गई, लेकिन वह उन लोगों के चेहरे से पर्दा क्यों नहीं उठातीं, जो विदेशी पैसे से पल रही तंजीमों के दादा हैं और गरीब लोगों को डरा-धमकाकर…

राजनीतिक रंगमंच पर झूठा नाटक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं) राहुल गांधी को अपने इतिहास ज्ञान पर जरूर घमंड होगा। सोचा होगा, बड़ी अदालत तुरंत मामला समाप्त करवाने का आदेश देगी, लेकिन उनके दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, या तो…

निराशा से उपजी पत्थरबाजी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक ( वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) नमाज शरीफ ने कहा कि वानी की मौत ने उन्हें बहुत बेचैन कर दिया है । दरअसल यह एक प्रकार से बुरहान को पाकिस्तान की ओर से दी गई श्रद्धांजलि ही थी । एक आतंकी को किसी सरकार द्वारा दी गई…

वैश्विक होता पाक का आतंकी संस्करण

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ( लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ) किताब का इस्लाम कैसा है, यह तो किताब पढ़ने वाले ही जानते होंगे, लेकिन उसका व्यावहारिक रूप कैसा है, यह सारी दुनिया देख रही है। उसका नया रूप पाकिस्तान तैयार कर रहा है, यह हैरानी…