विदेशी आक्रमणों के निहितार्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार गुरु नानक देव जी सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुगों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि प्रत्येक युग में एक-एक वेद प्रमुख था, लेकिन कलियुग की तो गति निराली है। कलियुग में अथर्ववेद की प्रमुखता थी,…

हिमाचल की बदलती राजनीति

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार इस बार सुखराम और वीरभद्र सिंह दोनों ही मंडी से भाजपा को उखाड़ने में एकजुट हो गए थे। दोनों को अपने परिवार, पुत्र / पौत्रों के भविष्य की चिंता थी, लेकिन मंडी के लोग इन दोनों परिवारों के पुत्र /…

नए अध्याय की शुरुआत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार इस पारिवारिक महल को पहला आघात तो 2014 में ही लग गया था, लेकिन अभी तक इस परिवार को विश्वास था कि यह एक बार फिर भारतीयों को धोखा देने में कामयाब हो जाएंगे और भारत के लोग अपना भाग्य इन के हाथों…

वासुकि मंदिर यात्रा के प्रयास

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार भद्रवाह में वासुकि नाग महाराज का यह मंदिर पता नहीं कितनी बार बना-बिगड़ा, कितनी बार इसने अपना आकार खोया और पाया, यह कौन कह सकता है । इस क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर इतिहास…

चुवानी पहर में बढ़ता तनाव

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो भूमि हिलती ही है। राजीव गांधी की यह हिलती हुई भूमि दिल्ली में तीन हजार सिखों को लील गई, लेकिन जो बात राजीव गांधी छिपा गए थे, वह यह कि…

नानक की यात्राओं में एकात्मता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार नानक की यात्राएं लोदी शासकों के राज्यकाल में हुई थीं। यह उस समय की तात्कालिक राजनीतिक स्थिति की ओर संकेत तो करती ही हैं, साथ ही यह सांस्कृतिक-सामाजिक स्थिति की ओर भी…

आखिर ये लोग कौन हैं?

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार अब असली प्रश्न जिस पर विचार करना जरूरी हो गया है, वह यह है कि आखिर ये लोग जो हिंदोस्तान में बैठकर पाकिस्तान के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं, वे लोग कौन हैं? जो लोग दावा करते हैं कि यदि वे न…

अंबेडकर को समझने की शर्त

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार यह ठीक है कि भारतीय समाज ने विदेशी शासन को कभी चुपचाप बैठकर स्वीकार नहीं किया, परंतु मूल प्रश्न यह है कि आखिर इतना बड़ा समाज मुट्ठीभर आक्रांताओं से पराजित कैसे हो जाता था? अलग-अलग…

जलियांवाला बाग से उठी ज्वाला

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पूरे तीन साल बाद मार्च 1922 को ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट को वापस ले लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जलियांवाला बाग में जब शांतिप्रिय जनता पर डायर की सेना गोलियों की बौछार कर रही थी,…

विभाजन से वायनाड तक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार केवल सत्ता के लिए मुस्लिम लीग से हाथ मिला लेना, एक प्रकार से सोनिया कांग्रेस का राष्ट्रवादी कदम ही माना जाएगा। यदि आज नेहरू-पटेल और महात्मा गांधी की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिंदा…

सैम का बयान और अंबेडकर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार इस मरहले पर बाबा साहिब अंबेडकर का ध्यान आता है। उनकी किताब थॉटस ऑन पाकिस्तान का ध्यान आता है। अंबेडकर ने उस किताब में आशंका जाहिर की थी कि यदि कल अफगानिस्तान भारत पर हमला कर देगा, तो भारत में…

महासमर का महागठबंधन

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार आखिर सोनिया गांधी को भी हिंदोस्तान में रहते हुए इतने साल हो गए हैं, इसलिए वह भी यहां के हवा-पानी को पहचानने लगी हैं। वह समझ गईं कि मीडिया को आगे करके, महागठबंधन का जो तिलिस्म खड़ा किया था,…

सेना पर सवाल जायज नहीं

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार सोनिया गांधी के वरिष्ठ नेता और नीति-निर्धारक दिग्विजय सिंह ने अपने पुराने सटीक अंदाज से अंत कर दिया। उसने कहा पुलवामा में भारतीय सैनिकों के मारे जाने का मामला तो महज एक दुर्घटना थी। अब बहस करने…

पुलवामा हमले के बाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार दुर्भाग्य यह है कि भारत की राजनीति में अपने आपको विपक्ष मानने का दावा कर रहे राजनीतिक दल यह भूल रहे हैं कि वे राज्य चला रही राजनीतिक पार्टी के विपक्ष में हैं, न कि देश के विपक्ष में।…

पाक संदर्भ में पुलवामा हमला

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार पुलवामा हमले के बाद महबूबा मुफ्ती पाकिस्तान के पक्ष में बोल कर इन अलगाववादी समूहों में फिर से अपनी पैठ बना सकेंगी, निश्चित ही ऐसा आकलन पुलवामा हमले की योजना बनाने वालों का रहा होगा और…