कश्मीर समस्या की जड़ की खोज

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं लद्दाख का रिंचन कश्मीर का राजा बन गया था, यहां तक तो ठीक है, लेकिन रिंचन मुसलमान बन गया और उसके पीछे-पीछे सारे कश्मीरी भेड़ों की तरह मुसलमान हो गए, इसको कश्मीर में भी दंत कथा से…

असम में एनसीआर से उठे प्रश्न

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ममता बनर्जी तो दहाड़ रही हैं कि यदि इन अवैध बांग्लादेशियों को बाहर निकाला, तो देश में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। खून की नदियां बह जाएंगी। कांग्रेस नरेश राहुल गांधी कह रहे हैं कि भाजपा…

गुरु पूर्णिमा पर उनका स्मरण

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं अंबेडकर भीषणतम परिस्थितियों की आग से तपकर निकले थे। समाज में से मिले अपमान के कारण गुस्से में भी थे, लेकिन अंतिम क्षण तक राष्ट्रहित के लिए लड़ते रहे। अंबेडकर बाहर और भीतर से एक समान…

सच बयां करती मौलाना की हरकत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कुरान शरीफ पढ़ने और समझने का दावा मौलाना का भी था और फराह ने भी कुरान-ए-पाक को समझ लिया होगा, तभी वे उसे उद्धृत कर रही थीं। मौलाना कुछ समय तो तर्क देते रहे, लेकिन जब फराह के तर्कों के…

दक्षिण भारत ने बखूबी निभाया था दायित्व

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शायद पूरे तमिलनाडु में दोपहर एक से लेकर चार बजे तक मंदिर बंद कर दिए जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद करने के लिए पूरे तमिलनाडु में ऐसी अभूतपूर्व एकता कैसे पनपी होगी? इसका भी कारण है,…

कश्मीर को लेकर कांग्रेस में एकता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं अलबत्ता सोज ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस में छोटे लोग कौन थे, जिन्होंने कश्मीर के मसले पर नेहरू को आगे नहीं बढ़ने दिया। सोज को पूरा यकीन है कि यदि तुच्छ मन वाले कांग्रेसी नेहरू को न…

जम्मू-कश्मीर सरकार का अंत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं बुखारी और औरंगजेब की हत्या के बाद महबूबा मुफ्ती को कोई साहसिक निर्णय लेना था। उसकी पार्टी को अब कौन सा रास्ता चुनना है, अलगाववादियों की सहानुभूति से सीटें जीतने का पुराना रास्ता या…

नागपुर में प्रणब मुखर्जी का संबोधन

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मुखर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी राष्ट्रीय महत्त्व के प्रश्नों पर लोक संवाद ही समाधान का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। किसी भी समाज में मत भिन्नता तो होगी ही। सहमत होना या असहमत होना मानव…

अंबेडकर ने समझाया रिलीजन और धर्म का अंतर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं उन्होंने मजहब या रिलीजन शब्द की परिधि निश्चित करते हुए लिखा कि मजहब का अर्थ है-‘ईश्वर में विश्वास, आत्मा में विश्वास, ईश्वर की पूजा, आत्मा का सुधार, प्रार्थना इत्यादि करके ईश्वर को…

चुनाव नतीजों के स्पष्ट संकेत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं इन चुनावों का एक संकेत स्पष्ट है। खासकर उत्तर प्रदेश में। वहां भाजपा बनाम सभी शेष दलों के बीच मुकाबला था, लेकिन जीत का अंतर इतना नहीं था, जिसका यह अर्थ निकले कि चुनाव एकतरफा हो गया…

कर्नाटक चुनावों के निहितार्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कर्नाटक ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार को उखाड़ने के इस अभियान में कर्नाटक भी मोदी के साथ है। सोनिया कांग्रेस सरकार ने लोगों की क्षेत्रीय भावनाओं को उभारने के लिए जम्मू-कश्मीर की…

मोदी सरकार के चार साल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं पिछले सत्तर साल में राजनीतिज्ञों ने अपने चाल, चरित्र और चेहरे के बल पर आम जनता का विश्वास ही नहीं खोया, बल्कि व्यवस्था के प्रति एक निराशा भी उत्पन्न की। सब एक थैली के चट््टे-बट्टे…

जिन्ना को लेकर उठा नया विवाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं एक वक्त ऐसा आया जब अंग्रेजों को महसूस हुआ कि जिन्ना को भारत की राजनीति में उतारा जाए। कई साल बाद वे जब लंदन से लौटे, तो वे बिल्कुल बदले हुए थे। स्वभाव और मानसिकता में नहीं, वह तो उनका…

आक्रांताओं के इरादे जानते थे अंबेडकर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कहा जाता है कि अंबेडकर ने अपनी पुस्तक ‘थाट्स आन पाकिस्तान’ में मुसलमानों के मनोविज्ञान और अन्य मजहबों को लोगों पर उनके दृष्टिकोण को लेकर कुछ ऐसी सख्त टिप्पणियां की थीं कि प्रकाशन से…

कठुआ-जज लोया में एक ही स्क्रिप्ट

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मुख्य मीडिया घरानों ने सभी को बताया कि ध्यान रखना चाहिए लड़की मुसलमान थी। उन्होंने लड़की का नाम भी बता दिया। अब मामला सीधा-साधा हिंदू  मुसलमान का बन सकता था। यह ठीक है कि उच्चतम…