फूटी कौड़ी तक नहीं खर्च पाए पार्षद

14वां वित्त आयोग के चलते जिला परिषद में फंड नहीं, जनता से क्या बोलें

कुल्लू- प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को पूरा एक वर्ष हो गया है, लेकिन एक साल का कार्यकाल होने के बाद भी प्रदेश का कोई भी पार्षद अपने वार्ड में फूटी कौड़ी तक खर्च नहीं कर पाया है। ऐसे में जिला परिषद सदस्यों को अभी से ही यह डर सताना शुरू हो गया है कि वे लोगों के बीच किस मुंह से जाएं। 14वां वित्त आयोग लागू होने के बाद जिला परिषद अध्यक्ष व सदस्यों की समस्त शक्तियों को जिस तरह से खत्म किया गया है, उससे पार्षद काफी आहत हैं। जानकारी के अनुसार जिला परिषद सदस्यों ने अपने वार्ड में 13वें वित्त आयोग का जो पैसा अपने-अपने वार्ड में आबंटित किया हुआ था तथा किन्हीं कारणों से काम शुरू नहीं हो पाया था, उस पैसे को भी जिला परिषद सदस्यों से वापस ले लिया गया था। ऐसे में अब हालात यह हो गए हैं कि प्रदेश भर में जब जिला परिषद की त्रैमासिक बैठक होती है, तब ही पाषर्द बैठकों में जा रहे हैं। इससे पहले पंचायतों के लिए जो भी बजट सरकार की ओर से मिलता था, उसका 50 प्रतिशत पहले जिला परिषद सदस्यों और 30 प्रतिशत पंचायत समिति को मिलता था, जबकि 20 प्रतिशत पैसा सीधे प्रधान को जाता था, लेकिन 14वां वित्त आयोग पारित होने के बाद 100 प्रतिशत पैसा सीधे प्रधान को ही जा रहा है। जिस कारण जिला परिषद के सदस्यों और पंचायत समिति के सदस्यों का पंचायत की विकासात्मक गतिविधियों में कोई रोल नहीं रह गया है। जिला परिषद सदस्यों का कहना है कि वे लोगों को भी इसके लिए संतुष्ट नहीं करवा पा रहे हैं, जिस कारण उन्हें काफी दिक्कतें हो रही हैं।

सीएम से मांगेंगे बजट

कुल्लू जिला परिषद अध्यक्ष रोहणी चौधरी का कहना है कि जिस तरह से 14वां वित्त आयोग लागू होने के बाद जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समिति के सदस्यों को विकास के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है, उससे वे काफी परेशान हैं। इस बाबत जल्द ही प्रदेश के जिला परिषद अध्यक्ष मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात कर विशेष बजट की मांग करेंगे, ताकि विकासात्मक गतिविधियों को बढ़ाया जा सके।