जीएसटी की मार… उद्योगपति भी परेशान

जीएसटी…सीधे शब्दों में कहें तो देश का सबसे बड़ा टैक्स। जिला में कुछ व्यापारी जीएसटी को ठीक तो कुछ इसे गलत बता रहे हैं। व्यापारी वर्ग के लिए एक पहेली बना यह टैक्स कई कारोबारियों को दिक्कतें खड़ी कर रहा है तो कई व्यापारियों का नजरिया जीएसटी पर अच्छा है। इसे लेकर ऊना के दुकानदारों से जब ‘दिव्य हिमाचल’ ने दुकानदारों ने यूं रखे अपने विचार….

जीएसटी समझ से परे

व्यापार मंडल गगरेट के अध्यक्ष राकेश पुरी का कहना है कि सरकार ने जीएसटी तो लागू कर दिया, लेकिन इसका व्यापक प्रसार व प्रचार न होने से व्यापारी अभी तक जीएसटी को समझ ही नहीं पाएं हैं। ऐसे में व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने में परेशानी हो रही है। जो छोटे व्यापारी पहले स्वयं ही रिटर्न भर लेते थे उन्हें भी अब इसके लिए सेवाएं हायर करनी पड़़ रही हैं।

दस लाख की सीमा तर्कसंगत नहीं

युवा व्यवसायी अमन पुरी का कहना है कि प्रदेश में छोटे व्यापारियों के लिए दस लाख रुपए की सीमा तर्कसंगत ही नहीं है। अगर किसी छोटे व्यापारी की रोजाना की सेल तीन हजार रुपए भी है तो भी उसकी सालाना सेल दस लाख रुपए से ऊपर चली जाती है। ऐसे में अधिकांश छोटे व्यापारी भी जीएसटी के फेर में आ रहे हैं।

जीएसटी से महंगाई बढ़ी

युवा व्यवसायी विपुल ठाकुर का कहना है कि ये कहना गलत न होगा कि जीएसटी से महंगाई बढ़ी है। यहां तक कि अपने सपनों का घर बनाना भी अब मंहगा हो गया है। भवन निर्माण सामग्री पर जीएसटी 18 व 28 प्रतिशत स्लैब में है। यानी अगर किसी ने एक लाख रुपए की निर्माण सामग्री खरीदी तो उसे अठारह या अठाइस हजार रुपए अधिक अदा करने पड़ेंगे।

जीएसटी में भी मिले इन्सेंटिव का लाभ

उपमंडल औद्योगिक संघ के महासचिव सुरेश शर्मा का कहना है कि वैट में उद्योगपतियों को प्रदेश सरकार द्वारा इन्सेंटिव दिया जाता था। अगर सौ रुपए वैट बना है तो उद्योगपति को 65 रुपए ही जमा करवाना पड़ते थे, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद उद्योगपतियों को इन्सेंटिव का लाभ नहीं मिल रहा है।