शायद प्रदेश सरकार को मानव अधिकार आयोग की कद्र नहीं

शिमला – प्रदेश में मानवाधिकार आयोग व लोकयुक्ता का गठन न करने पर प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी दर्ज की है। मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार को मानवाधिकार की कद्र है या नहीं। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह मामले की आगामी सुनवाई तक मानवाधिकार कमीशन के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति के बारे में विभिन्न हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सूचित करें और इसकी जानकारी अदालत को सौंपे। राज्य    सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति के बारे में मामला विचाराधीन है।  हाई कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या पांच सालों तक  मानवाधिकार कमीशन के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति के बारे में मामला विचाराधीन है।  मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे  कि वह एक सप्ताह के भीतर अदालत को बताए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार राज्य में मानवाधिकार आयोग की स्थापना क्यों नहीं की गई। मामले पर सुनवाई 13 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है। न्यायालय के समक्ष दायर जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि स्टेट ह्यूमन राइट कमीशन वर्ष 2005 से कार्य नहीं कर रहा है। राज्य सरकार की ओर से इसे क्रियाशील रखने के लिए जरूरी पदों पर नियुक्तियां नहीं की गई हैं।