
कांगड़ा के बनखंडी में करोड़ों रुपए की लागत से नॉर्थ इंडिया के पहले इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क का निर्माण किया जा रहा है। इसके पहले चरण का काम करीब 90 प्रतिशत पूरा हो गया है। इस पार्क के निर्माण के उपरांत ...
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 की तैयारियां अब धीरे-धीरे रफ्तार पकडऩे लगी हैं। 20 अक्तूबर से 26 अक्तूबर तक आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध देव समागम के लिए दशहरा उत्सव समिति कुुल्लू ने देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई देवी-देवताओं के कारदारों तक निमंत्रण पत्र पहुंच भी चुके हैं। निमंत्रण मिलने के साथ ही देव समाज में दशहरा उत्सव को लेकर उत्साह का माहौल बनने लगा है। दशहरा उत्सव समिति की ओर से करीब 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजे जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को चार महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें भारतीय स्टांप विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। दो अन्य विधेयक बिना चर्चा के ही पारित कर दिए गए। भारतीय स्टांप विधेयक को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार इस कानून में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपए तक की संपत्ति की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम कराने पर स्टांप शुल्क आठ से घटाकर चार प्रतिशत किया गया है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि कुल 65 प्रावधानों में से 49 में संशोधन किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के बड़े बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य बांध सुरक्षा संगठन की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में तीन बांधों पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को मानसून सत्र के अंतिम दिन वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में एसडीएसओ के अधिकार क्षेत्र में 17 बांध हैं। इनमें 15 बांध पूरी तरह चालू हैं, जबकि दो बांध निर्माणाधीन हैं। चालू बांधों का इस वर्ष प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून दोनों चरणों में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकांश बांधों की स्थिति संतोषजनक पाई गई, लेकिन गिरि जटोन बैराज, मलाणा-1 और मलाणा-2 जलविद्युत
बद्दी-नालागढ़ में टेपेंटाडोल सहित भारी मात्रा में दवाओं की बरामदगी के मामले में एनसीबी की कार्रवाई के बाद अब हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने भी कानूनी शिकंजा कस दिया है। राज्य दवा विभाग ने बिना वैध लाइसेंस दवाओं के भंडारण से जुड़े स्टाक को जब्त कर मामला अदालत के समक्ष पहुंचा दिया है। कार्रवाई के दौरान करीब 1200 किलोग्राम खुली टेबलेट्स भी कब्जे में ली गई हैं, जिनमें टेपेंटाडोल होने का संदेह जताया गया है। पुष्टि के लिए इनके नमूने प्रयोगशाला जांच को भेजे गए हैं। बताते चलें कि एनसीबी से मिले इनपुट के आधार पर ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने ड्रग इंस्पेक्टरों की अलग-अलग टीमें गठित कर बद्दी-नालागढ़ में कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। बद्दी में जांच के दौरान एक परिसर से बड़ी मात्रा में दवाओं का स्टाक मिला। मौके पर मौजूद व्यक्ति न तो वैध ड्रग लाइसेंस दिखा पाया और न ही खरीद रिकार्ड व भंडारण से जुड़े अधिकृत दस्तावेज प्रस्तुत कर सका। इसके बाद विभाग ने स्टॉक को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत जब्त कर लिया। जब्त स्टाक में एंटीबायोटिकए दर्द निवारक, एंटी-एलर्जिक और गैस्ट्रिक संबंधी दवाएं भी बड़ी मात्रा में शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश में सक्रिय भू-माफिया के खिलाफ प्रदेश सरकार का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 1981 में अलॉट हुई जमीन की फर्जी खरीद-फरोख्त के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी नेकराम निवासी धर्मशाला को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच तारीख तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के राजस्व विभाग और अवैध रूप से जमीन के कारोबार में लिप्त लोगों में भारी हडक़ंप मच गया है। मामले की जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि यह पूरा धंधा धर्मशाला के एक पोश एरिया मोहली की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है, जो मूल रूप से वर्ष 1981 में अलॉट की गई थी। आरोप है कि नेकराम ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ कथित तौर पर गहरी मिलीभगत करके इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इसकी खरीद-फरोख्त कर डाली।
राज्य में नशे के बाजार का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। सरकार नशे पर जितनी तेजी से लगाम कस रही है, उतनी ही तेजी से इसका विस्तार भी होता दिख रहा है। यहां पर नशे का करोड़ों का व्यापार और नोट बटोरने का लालच असमाजिक तत्त्व ही नहीं कर रहे, बल्कि 50 फीसदी से अधिक युवा अपनी डोज को पूरा करने के लिए इस गंधे धंधे में कूदे हैं। तीन महीने के मामलों पर गौर करने से पता चलता है कि इस धंधे में चरस को मात देकर चिट्टा अब बादशाह बन गया है। जिला कुल्लू में नशे के 33 मामलों में 17 मामले चिट्टे के ही है। इस तरह तीन महीनों में 50 फीसदी से अधिक चिट्टे के मामले हो गए हैं। युवतियां सहित महिलाएं भी इस नशे में शामिल हंै। इस नशे के दलदल से युवा पीढ़ी को निकालना पुलिस प्रशासन और सरकार को काफी मुश्किल सा हो गया है। यदि कदम-कदम पर जनता खुद इसके खिलाफ कूद जाएगी, तो ही इसके सार्थक परिणाम की उम्मीद की जा सकती है।
प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गत बुधवार रात शिमला सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई। बारिश के कारण कई जगह भू-स्खलन हुआ और सडक़ों पर मलबा आ गया ,,,
हिमाचल विधानसभा के सभी विधायकों को अब डिस्टिंक्ट फ्लैग यानी एक खास झंडी मिलेगी। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने मानसून सत्र के आखिरी दिन ये जानकारी दी। एक सप्ताह के भीतर सभी...