निजी बस ऑपरेटरों ने सरकार से की सिफारिश
महिलाओं को बस किराए में छूट भी करें बंद
फिर उठाया मिशन की बसों को कलस्टर से बाहर चलाने का मुद्दा
चीफ रिपोर्टर- शिमला
प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों ने सरकार से न्यूनत्तम किराया बढ़ाने की मांग उठाई है। उन्होंने सरकार से कहा है कि प्रदेश में न्यूनत्तम यात्रा किराया बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि महंगाई के इस दौरान में प्राइवेट ऑपरेटरों को वर्तमान किराए से काम चलाना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ प्राइवेट ऑपरेटरों ने एचआरटीसी की कलस्टर से बाहर चल रही बसों का मुद्दा भी उठाया है जिसे लेकर मंगलवार को परिवहन निदेशक ने बैठक भी बुलाई है। इन्होंने महिलाओं को निगम की बसों में दी जा रही छूट को भी बंद करने की मांग की है। निजी बस आपरेटर संघ के अध्यक्ष राजेश पाराशर, महासचिव रमेश कमल, प्रदेश के समस्त जिला निजी बस ऑपरेटर अध्यक्ष कांगड़ा से रवि दत्त शर्मा, चंबा से मनोज केशव, हमीरपुर से विजय ठाकुर, कुल्लू से रजत जमवाल, मंडी से गुलशन नंदा और हंस ठाकुर, बिलासपुर से राजेश पटियाल, सिरमौर से बलविंदर सिंह, शिमला से रोशन लाल कमल ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में कुछ सीडब्ल्यूसी में परिवहन विभाग और हिमाचल पथ परिवहन निगम को आदेश किया था कि वह केंद्र सरकार की स्कीम के तहत आई जेएनएनआरयूएम की बसों को प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 13 कलस्टर के बाहर नहीं चलाएंगे परंतु उस समय भी परिवहन विभाग और हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा उपरोक्त बसों को प्रदेश में लंबी दूरी के परमिट और अंतर राज्य रूटों पर पठानकोट होशियारपुर चंडीगढ़ अंबाला कालका और कांगड़ा से परमाणु के लिए वाया नंगल किरतपुर रूटों पर धड़ल्ले से चलाया जा रहा था।
उस समय बार-बार आग्रह करने पर भी हिमाचल पथ परिवहन निगम ने इन बसों को नहीं रोका और तब निजी बस ऑपरेटरों ने हिमाचल पथ परिवहन निगम और परिवहन विभाग के खिलाफ कोर्ट में मामला दायर किया। अब एक बार फिर से वैसा ही हो रहा है जिसे सहन नहीं किया जाएगा। इन्होंने परिवहन विभाग और हिमाचल सरकार से विनम्र आग्रह किया है कि यह बसें हमारे साथ विभिन्न रूपों में प्रदेश में प्रतिस्पर्धा में चल रही हैं और कोर्ट के आदेशों के खिलाफ चल रही हैं। ऊपर से सरकार द्वारा इन बसों का स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स माफ कर रखा है। जबकि प्राइवेट बसों पर स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स लगता है। जब यह हमारे बराबर सवारियां उठाते हैं और सवारियों से एक जैसा बस किराया वसूलती हैं तो इन्हें कोर्ट के आदेशों के विरुद्ध हमारे बराबर क्यों चलाया जा रहा है ऐसी प्रक्रिया से हिमाचल प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों को अत्यंत घाटा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पूरे भारत वर्ष में न्यूनतम बस किराया 15 रूपए से अधिक है जबकि हमारे पड़ोसी राज्य पंजाब में पिछले 12 वर्षों से न्यूनतम बस किराया 10 रूपए था जिसे पंजाब सरकार ने 6 माह पहले न्यूनतम बस किराए को 10 से बढ़ाकर 15 रूपए कर दिया है। जबकि हिमाचल प्रदेश पहाड़ी क्षेत्र है और हम प्रदेश सरकार से आग्रह करते हैं कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण प्रदेश में न्यूनतम बस किराया 20 रूपए निर्धारित किया जाए ताकि बसों का रखरखाव सही तरीके से किया जा सके। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हिमाचल सरकार ने हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को 50 फीसदी किराए में छूट का प्रावधान किया है और उसके एवज में प्रदेश सरकार हिमाचल पथ परिवहन निगम को 170 करोड रुपए का अनुदान दे रही है। इस प्रक्रिया से प्रदेश में निजी बस ऑपरेटर की बसों में सवारी का अत्यंत अभाव हो गया है। इसलिए उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि अगर सरकार महिलाओं को स्पेशल सुविधा देना चाहती है तो वह सुविधा निजी बस ऑपरेटर भी देने के लिए तैयार हैं परंतु जिस प्रकार हिमाचल पथ परिवहन निगम को महिलाओं को किराए में 50 फीसदी छूट के एवज में 170 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाता है इस तरह निजी बस ऑपरेटरों को भी मुआवजा दिया जाए या इस छूट को बंद किया जाए। इससे हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम और निजी क्षेत्र में चल रही बसों में सवारी का आबंटन ठीक नहीं हो पा रहा है। कोई भी नियम या कानून या छूट प्रदेश सरकार द्वारा दी जानी है तो एक समान दी जाए।
—शकील कुरैशी