सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 20 बीघा की अधिकतम सीमा के साथ सरकारी की नई पॉलिसी तैयार
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — शिमला
हिमाचल में लघु एवं सीमांत किसानों और भूमिहीन लोगों का सरकारी या वन भूमि पर अतिक्रमण रेगुलर हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य के राजस्व विभाग ने इस बारे में नई पॉलिसी बना ली है। इसमें कुल 20 बीघा की अधिकतम सीमा का प्रावधान किया गया है। राजस्व विभाग ने इस पॉलिसी ड्राफ्ट को विधि विभाग को भेजा है। इसी पॉलिसी पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में गुरुवार को यहां मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक हुई। बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी मौजूद रहे। बैठक में अवगत करवाया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार लघु एवं सीमांत किसानों के भूमि कब्जों को नियमित करने के लिए नीति तैयार कर दी गई है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस नीति को अब मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जाएगा।
कैबिनेट में स्वीकृति के उपरांत इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा। बैठक में प्रधान सचिव विधि राजीव बाली, अतिरिक्त सचिव राजस्व अनिल चौहान और वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। इससे पहले 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी एवं वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने से जुड़े मामलों में महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उन आदेशों को निरस्त कर दिया था, जिनमें कथित अतिक्रमित वन भूमि पर लगे सेब एवं अन्य फलदार पेड़ों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था कि ऐसे मामलों में नीति निर्धारण का अधिकार राज्य सरकार के पास है और न्यायालय के व्यापक निर्देशों के दूरगामी एवं गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व में उच्च न्यायालय ने स्वयं राज्य सरकार को इस विषय पर समग्र दृष्टिकोण अपनाकर नीति बनाने की सलाह दी थी, जिसमें निजी भूमि मालिक अतिक्रमणकारियों और भूमिहीन लोगों के बीच अंतर किया जाए।
एफसीए एक्ट बनेगा पॉलिसी में रोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन भूमि क्षेत्रों में सेब अथवा अन्य फलदार वृक्ष लगाए गए हैं और जहां स्वस्थ बागान मौजूद हैं, उनके नियमितीकरण अथवा आबंटन का प्रश्न राज्य सरकार द्वारा नीति के माध्यम से तय किया जाना चाहिए। अदालत ने सभी अपीलों को स्वीकार करते हुए हिमाचल हाई कोर्ट के आदेशों और स्वत: संज्ञान से शुरू की गई कार्यवाहियों को भी समाप्त कर दिया था। साथ ही राज्य सरकार को इस विषय पर नीति तैयार कर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अब सरकार इस नई पॉलिसी को भारत सरकार के सामने रखेगी। चूंकि इसमें वन संरक्षण अधिनियम यानी एफसीए ही बाधा बनेगा। सुप्रीम कोर्ट को भी इस नई पॉलिसी से अवगत करवाया जाएगा।