वन भूमि पर बिना मंजूरी बनी 2183 सडक़ों की जांच में खुलासा, मार्गों को मान्यता देने के लिए विभाग ने शुरू की कसरत
वरिष्ठ संवाददाता — शिमला
प्रदेश में 600 से अधिक सडक़ों को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत मंजूरी मिलेगी। सडक़ों को एफआरए में मान्यता देने के लिए सरकार की ओर से 2183 सडक़ों की जांच के आदेशों के बाद यह आंकड़ा सामने आया है। हालांकि इनमें कुछ सडक़ें ऐसी भी हैं, जिनको लेकर एफसीए के तहत प्रक्रिया चल रही है। लिहाजा अब इन सडक़ों को भी एफआरए के तहत मंजूरी प्रदान करने के लिए पहले लोक निर्माण विभाग को एफसीए के केस वापस लेने होंगे और नए सिरे प्रक्रिया आरंभ करनी पड़ेगी। बड़ी बात यह है कि इन सडक़ों को एफआरए के दायरे में लाने से राज्य सरकार के 80 से 100 करोड़ रुपए की भी बचत होगी। जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद राज्य सरकार ने बिना एफसीए मंजूरी की बनी 2183 सडक़ों पर कार्रवाई के लिए अधिसूचना जारी की थी और संबंधित विभागों को इन सडक़ों की जांच कर एफआरए के तहत मंजूरी प्रदान करने को कहा गया, ताकि संबंधित भूमि को हस्तातंरण किया जा सके।
अब तक की जांच में सामने आया है कि 2183 सडक़ों में 600 से अधिक ऐसी हैं, जिन्हें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत मंजूरी प्रदान की जा सकती है और अधिनियम की शर्तों को भी पूरा करती है। जांच में पता चला है कि इन सडक़ों का निर्माण एक हेक्टेयर या फिर इससे कम वन भूमि पर होगा। सूत्रों का कहना है कि 600 से अधिक सडक़ों में 117 ऐसी हैं, जिन्हें एफसीए के तहत स्वीकृति के लिए मामले चल रहे हंै। लिहाजा अब लोक निर्माण विभाग को सबसे पहले इन एफसीए के मामलों को वापस लेना होगा और इन्हें एफआरए के दायरे में लाने के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। उधर, एफआरए की शर्तों को पूरा करने वाली सडक़ों को मंजूरी प्रदान करने के सुक्खू सरकार के फैसले से राज्य सरकार की एक बड़ी राशि की बचत भी होगी। चंूकि एफसीए के तहत मंजूरी के लिए नेट प्रजेंट वैल्यू (एनपीवी) के रूप में भी एक बड़ी राशि जमा करवानी पड़ती है। इसके अलावा अन्य शर्तों को भी पूरा करना होता है, जबकि वन अधिकार अधिनियम के तहत राज्य को एनपीवी जमा करवानी की जरूरत नहीं रहेगी।
2183 सडक़ों में इन जिलों के रोड शामिल
वन भूमि पर बिना मंजूरी के बनी सडक़ों को लेकर राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए आदेशों पर संबंधित विभाग कार्रवाई में जुटे हुए है। इन 2183 सडक़ों में मंडी जोन की 821, शिमला 613, हमीरपुर 254 और कांगड़ा जोन की 495 सडक़ें शामिल है। अब संबंधित विभाग जांच कर रहे हैं कि कितनी सडक़ें एफआरए की शर्तों को पूरा करती है, ताकि उन्हें प्रक्रिया में लाकर आगामी सरकार के आदेशों के तहत कार्रवाई की जा सकें।