दिव्य हिमाचल सर्वे में 60 प्रतिशत लोगों ने विरोध में दिया अपना मत
जीवन ऋषि
हाल ही में सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ ने हिमाचल सरकार से मांग रखी थी कि केंद्र सरकार की तर्ज पर हिमाचल के सरकारी दफ्तरों में भी फाइव डे वीक किया जाए। संघ का तर्क था कि इससे सरकार की सालाना 100 करोड़ रुपए की बचत होगी, साथ ही दो दिन आराम मिलने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। इसी मसले को दिव्य हिमाचल मीडिया हाउस ने अपने साप्ताहिक सर्वे में जनता के समक्ष उठाया। जनता से सवाल पूछा गया कि ‘क्या हिमाचल के सरकारी कार्यालय फाइव-डे वीक के साथ सही चल पाएंगे?’ इस सवाल पर कुल 1040 लोगों ने अपनी राय दी। इनमें 60 प्रतिशत लोगों ने ‘नहीं’ के आप्शन पर क्लिक करके फाइव-डे वीक के मसौदे को नकार दिया।
हालांकि सर्वे में 37 प्रतिशत लोगों ने ‘हां’ के आप्शन लाइक देकर इस कांसेप्ट का सपोर्ट किया, जबकि तीन पतिशत ने ‘पता नहीं’ कहकर सवाल का जवाब देना सही न समझा। बेशक, इस मसले पर अभी सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन सर्वे में दिव्य हिमाचल टीवी के फेसबुक पेज, यूट्यूब चैनल व न्यूज वेबसाइट दिव्य हिमाचल डॉटकॉम पर जनता ने खुलकर अपनी राय दी। कुल मिलाकर अभी हिमाचल का एक बड़ा वर्ग फाइव-डे वीक के लिए तैयार नहीं है।
रोजाना दो घंटे बढ़ाएं
सर्वे के कमेंट सेक्शन में शौर्य अवस्थी ने लिखा..नहीं..वे पांच दिन में इसे हैंडल नहीं कर पाएंगे। अरुण संधू ने सुझाव दिया कि रोजाना काम के दो घंटे बढ़ा दिए जाएं, तो फाइव डे वीक ठीक रहेगा। अशोक कुमार ने कहा हां..केंद्र सरकार के विभागों में ऐसा होता है। संजीव कुमार का कमेंट था कि लोगों के काम नहीं रुकने चाहिएं, चाहे पांच दिन हों या सात। फेसबुक यूजर राजेश, विराट, दोरजे बौद्ध आदि ने फाइव डे वीक का समर्थन किया।
नो वर्क नो पे
अपने कमेंट मेंं राजपूत मनोज, सुनील पाठक ने ‘नो वर्क नो पे’ की बात कही। योगराज ने लिखा कि पहले ही दफ्तरों में स्टाफ की कमी है, फाइव डे वीक से काम का बोझ बढ़ेगा। पंकज कौंडल का तर्क था कि जहंा यह व्यवस्था लागू है, उनके नतीजों से ही पता चल सकेगा। आकाश ठाकुर का सुझाव था कि पहले काम की गति बढ़ानी चाहिए। इसके अलावा कई लोग इसके पक्ष में तो कई विरोध में अपने तर्क देते नजर आए।