दिव्य हिमाचल ब्यूरो — शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में बड़ा फैसला लेते हुए एकमुश्त विशेष व्यवस्था के तहत उन मामलों पर दोबारा विचार करने का निर्णय लिया है, जिन्हें पहले केवल आर्थिक रूप से निर्धन नहीं पाए जाने (नॉन-इंडिजेंसी) के आधार पर खारिज कर दिया गया था। वित्त विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, ऐसे आश्रित अब 31 दिसंबर, 2026 तक संबंधित विभागाध्यक्ष के पास आवेदन देकर अपने मामले की दोबारा जांच करवाने के पात्र होंगे। सरकार परिवार की वर्तमान आर्थिक स्थिति का नए सिरे से आकलन करेगी और मौजूदा अनुकंपा नियुक्ति नीति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति किसी का अधिकार नहीं है, बल्कि केवल उन्हीं परिवारों को दी जाती है, जो वास्तव में आर्थिक तंगी और अभाव में जीवन यापन कर रहे हों। इसी आधार पर पहले भी मामलों का निस्तारण किया जाता रहा है। कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह सुविधा केवल उन मामलों पर लागू होगी, जिन्हें पहले केवल निर्धनता के अभाव के आधार पर अस्वीकृत किया गया था।
अन्य किसी कारण से खारिज मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि पात्र आश्रित 31 दिसंबर, 2026 तक आवेदन अवश्य जमा करें। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आवेदन मिलने के एक माह के भीतर संबंधित विभाग को निर्णय लेना होगा। यदि कोई आवेदक सभी शर्तों को पूरा करता है और अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र पाया जाता है, तो नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले संबंधित विभाग को मुख्यमंत्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। कार्यालय ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कक्षा-3 के जॉब ट्रेनी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) पदों पर नियुक्तियां भर्ती निदेशालय के माध्यम से की जाएंगी, जबकि कक्षा-4/मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) पदों पर नियुक्तियां सरकार की प्रचलित कॉमन एमटीडब्ल्यू नीति के अनुसार होंगी। आवश्यकता होने पर प्रत्यक्ष भर्ती के पांच प्रतिशत कोटे की सीमा में भी एकमुश्त छूट दी जाएगी।